झारखंड भाजपा में नहीं है 'ऑल इज वेल'
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झारखंड भाजपा में नहीं है 'ऑल इज वेल'
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ (फाइल फोटो)

झारखंड भाजपा में सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा. जहां एक ओर सरकार की कार्यप्रणाली पर पार्टी के लोग ही सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं कार्यकर्ताओं के सम्मान को लेकर भी आवाज उठ रही है.

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झारखंड भाजपा में सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा. जहां एक ओर सरकार की कार्यप्रणाली पर पार्टी के लोग ही सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं कार्यकर्ताओं के सम्मान को लेकर भी आवाज उठ रही है.

खुद अध्यक्ष ने खोली पोल

झारखंड भाजपा के भीतर कलह की बात जब तब उठती रहती थी. पीएम नरेंद्र मोदी से पिछले दिनों अर्जुन मुंडा से मुलाकात की खबर ने भी मीडिया में कयासों का बाजार गर्म किया. लेकिन अब सब सतह पर आ गया है. इसे उजागर करने वाला भी कोई और नहीं, बल्कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने ही पार्टी के अंदरुनी हालात को सामने कर दिया है.



'तुम' का तमाचा
गिलुआ ने खुद इस बात को स्वीकार किया की पार्टी के कार्यकर्त्ताओं को सम्मान नहीं मिल रहा है. पार्टी के एक कार्यकर्ता ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास लगभग हर शख्स को 'तुम' का संबोधन ही देते हैं. यह कई बार खटकने वाला होता है. पार्टी के एक बुजुर्ग कार्यकर्ता ने कहा कि तीस साल इस पार्टी को दे दिए. कभी किसी पद की लालसा नहीं की. पर अब जब बात सम्मान की आती है तो सब व्यर्थ लगता है. इन्हीं मसलों पर पिछले दिनों लक्ष्मण गिलुआ ने कहा कि कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास को सभी भाजपा कार्यकर्ताओं को सम्मान देना चाहिए.कार्यकर्ता ही संगठन की रीढ़ हैं.

काम के तौर तरीके पर सवाल

गिलुआ ने सार्वजनिक तौर पर माना कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि सरकार अधिकारी चला रहे हैं.  सरकार के शराब बेचने के मसले पर  रघुवर दास के खिलाफ उनके ही कई मंत्रियों ने आवाज उठाई. सबसे मुखर विरोध राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री सरयू राय का रहा जिन्होंने दो दिन पहले भी बसान दिया कि मंत्री पद भले चला जाए, शराब बेचने का विरोध करता रहूंगा. माइंस नवीनीकरण मामले में सरयू राय ने मुख्यमंत्री के सचिव की चिट्ठी लिखकर इस मामले में रिपोर्ट मांगी है.

मुलाकात की बात

पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा की प्रधानमंत्री से लगभग आधे घंटे की मुलाकात ने मीडिया की सुर्खियां ही नहीं बटोरी, बल्कि मुंडा के अंदाज में भी बदलाव लाया.अर्जुन मुंडा अब खुलकर सरकार के सीएनटी और एसपीटी संशोधन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं.  करिया मुंडा ने भी इस मामले में खुल कर विरोध किया है.
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