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जानवरों के इस जब्बात पर किसी को भी रोना आ जाए, मालिक को गुजरे 2 हफ्ते बीत गये अभी भी बहा रहे हैं आंसू

सजल दा ने अपने घर में कुत्ते और खरगोश पाल रखे थे.
सजल दा ने अपने घर में कुत्ते और खरगोश पाल रखे थे.

सजल दा (Sajal Chakraborty) ने स्ट्रीट डॉग्स के लिए खूंटी और रांची में दो आश्रम खोले रहे थे. अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा वो जानवरों पर खर्च किया करते थे.

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रांची. झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती (Sajal Chakraborty) को गुजरे हुए दो हफ्ते से ज्यादा का समय बीत गया. लेकिन आज भी उनके घर पर रहने वाले कल्लू, छोटी और गोलू समेत तमाम जानवर अपने मालिक के इंतजार में बैठे हैं. दरवाजे पर एक आहट उनके लिए किसी उम्मीद से कम नहीं होती. चेहरे पर फरिश्ते जैसा नूर, फक्कड़ अंदाज और पशु-पंक्षियों से जज्बाती रिश्ता. कुछ ऐसी ही पहचान थी सजल दा की.

सजल दा के फ्लैट में जानवरों की देखभाल करने वाले कमल बताते हैं कि साहब ने घर में पांच कुत्ते और दूसरे फ्लैट में कई खरगोश पाल रखे थे. उन्होंने स्ट्रीट डॉग के साथ-साथ रोड एक्सीडेंट में घायल कुत्तों को सड़क से उठाकर अपने घर में लाकर पाला था.

ये जानकारी देते हुए कमल कई बार भावुक हो जाते हैं. उनके आंसू नहीं थमते. कमल की मानें तो वह बोकारो के बेरमो के रहने वाले हैं. 3 साल पहले सजल दा ही उन्हें वहां से अपने साथ रांची लेकर आए. उसके बाद से ही वह उनके घर पर रहकर जानवरों की देखभाल करने लगे.



जानवरों के साथ सजल दा के रिश्तों को बताते हुए कमल कहते हैं कि साहब जब भी घर पर होते थे, वो अपनी गोद में कुत्ते और खरगोश को हमेशा बिठाकर रखते थे. साथ ही उनके खाने-पीने का बेहद ध्यान रखते थे.
सजल चक्रवर्ती के करीबी पारिवारिक मित्र और जेएमएम नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने बताया कि उनकी पूरी जिंदगी ही जानवरों के लिए समर्पित थी. सजल दा के पास हाथी भी थे, जो उन्होंने बेतला में रखा था. वही हजारीबाग में कुछ घोड़े और बिरसा जू में उनके 17 बंदर हैं. इसके अलावा स्ट्रीट डॉग के लिए खूंटी और रांची के अनगढ़ा में उनके दो आश्रम भी हैं. सजल दा ने अपनी जिंदगी की कमाई का बड़ा हिस्सा जानवरों पर खर्च किया.

बतौर सुप्रियो आज भले ही सजल दा स्वर्ग सिधार चुके हों, लेकिन अपने जीवन काल में ही उन्होंने इन जानवरों के गुजारे के लिए पूरी व्यवस्था कर रखी थी. वो इन्हें अपने बच्चों की तरह प्यार करते थे. उनके घर पर रहने वाले तमाम जानवर भले ही इंसानों की तरह लब्जों से अपनी भावना नहीं जता पा रहे हो, लेकिन उनकी आंखों में सजल दा के प्रति जज्बात साफ दिखता है. आज भी ये जानवर अपने मालिक का बेताबी से इंतजार कर रहे हैं.
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