• Home
  • »
  • News
  • »
  • jharkhand
  • »
  • जज्‍बे को सलाम! आंखों में ओलंपिक पदक जीतने का सपना लिए रोज 735 सीढ़ियां चढ़ती और उतरती हैं सावित्री

जज्‍बे को सलाम! आंखों में ओलंपिक पदक जीतने का सपना लिए रोज 735 सीढ़ियां चढ़ती और उतरती हैं सावित्री

Jharkhand Sports News: सावित्री ओलंपिक में पदक जीतने की ख्‍वाहिश रखती हैं. (न्‍यूज 18)

Jharkhand Sports News: सावित्री ओलंपिक में पदक जीतने की ख्‍वाहिश रखती हैं. (न्‍यूज 18)

Positive News: सावित्री का घर जोन्‍हा जलप्रपात की दूसरी तरफ है, जबकि तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र अलग दिशा में है. ऐसे में जलप्रपात पार करने के लिए उन्‍हें रोजना 735 सीढ़ियों को चढ़कर मुख्‍य सड़क तक जाना होता है. सीढ़ियां चढ़ते वक्‍त वह साइकिल को अपने सिर या फिर कंधे पर उठाकर चढ़ाई करती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:

    निरंजन कुमार सिंह 

    रांची. झारखंड की राजधानी रांची से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर स्थित अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध जोन्हा जलप्रपात में कभी भगवान बुद्ध ने स्नान किया था. खुद में अनुपम सौंदर्य और अपार ऊर्जा समेटे इस झरने की श्वेत धवल जलधारा 150 फीट की ऊंचाई से निरंतर प्रवाहित होती रहती है. जलप्रपात की ऊर्जा और शक्ति को 19 साल की तीरंदाज सावित्री कई वर्षों से करीब से महसूस कर रही है. उनका संघर्ष, जुनून और बुलंद इरादे जोन्‍हा जलप्रपात से किसी भी मायने में कम नहीं है. यहां की सीढ़‍ियों पर भी सामान्य सी दिखने वाली सावित्री के जज्बे की गहरी और अमिट छाप दिखती है. सावित्री रोजाना तीरंदाजी का अभ्यास करने घर से प्रशिक्षण केंद्र जाने के क्रम में झरने के निचले हिस्से से ऊपर सड़क तक आती हैं. इस क्रम में वह प्रतिदिन तकरीबन 735 सीढ़ियां चढ़ती और उतरती हैं. इस क्रम में वह अपनी साइकिल को सिर और कंधे पर लेकर चलती हैं. शाम को घर वापसी के वक्‍त भी सीढ़‍ियां उतरने में यही प्रक्रिया दोहराती हैं.

    जोन्हा के पास ही स्थित कोनारडीह गांव की रहनेवाली सावित्री हर दिन झरने से होकर गुजरती हैं. झरने के इस पार सावित्री का गांव है और वहां से तकरीबन 10 किलोमीटर दूर उस पार जोन्हा तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र स्थित है. साइकिल चलाकर झरने की सीढ़ियों को पार नहीं किया जा सकता, इसलिए साइकिल को उठाकर इस सफर को तय करना सावित्री की मजबूरी है. सीढ़ियां चढ़ने के बाद आगे की यात्रा तय करने के लिए वह साइकिल चलाकर जाती हैं.

    क्षमता, आत्मविश्वास, मेहनत और लगन से भरपूर झारखंड की प्रतिभाएं कभी भी संसाधनों की मोहताज नहीं रहीं हैं. खेल के क्षेत्र में तो संकल्प के बूते यहां की प्रतिभाओं ने लगातार अपने-दम-खम का लोहा मनवाया है. ऐसी ही प्रतिभाओं में सावित्री भी शुमार हैं. वह 5 बहनों में सबसे छोटी हैं. सावित्री बताती हैं कि कई बार वह खाली पेट ही अभ्यास करने के लिए घर से चल देती हैं. सेंटर पहुंचने में दो घंटे लगते हैं. इसलिए घर से काफी पहले निकलना पड़ता है. सावित्री चैंपियन बनने के साथ नौकरी भी करना चाहती हैं, ताकि परिवार के भरण-पोषण करने में माता-पिता का सहयोग कर सकें.

    झारखंड: JSCA स्टेडियम में 19 नवंबर को टीम इंडिया और न्यूजीलैंड के बीच होगा T-20 मुकाबला

    तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र पहुंचने में उन्हें रोज डेढ़ से 2 घंटे का वक्‍त लगता है. गरीब परिवार से आनेवाली सावित्री 11वीं कक्षा की छात्रा हैं और भविष्य में बड़ी तीरंदाज बनकर ओलिंपिक में अपने देश के लिए पदक लाने की इच्छा रखती हैं. उनकी आंखों में सफलता की बुलंदियां छूने का सपना दिखता है.

    जोन्हा जलप्रपात की सीढ़‍ियों पर पड़ते सावित्री के तेज कदम खेल के प्रति उनके जुनून और संकल्प को दर्शाता है. विकास की चमक-दमक और साधन-सुविधाओं से दूर, लेकिन अपार क्षमता से भरपूर झारखंड की बेटियों को कमोबेश ऐसे ही संघर्ष से गुजरना पड़ता है. यहां पगडंडियों पर दौड़कर और बांस की हाकी स्टिक व धनुष से अभ्यास कर बेटियां बड़ी से बड़ी प्रतिस्पर्धाओं में मैदान मार लेती हैं. विषम परिस्थितियों में रह रही सावित्री जैसी चैंपियन बेटियों को मौका, सहयोग और प्रोत्साहन मिले, तो उनमें पदकों का अंबार लगाने की अद्भुत क्षमता है.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज