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COVID-19: अर्जुन मुंडा ने बताया- आदिवासी समुदायों के बीच कैसे रोक रहे कोरोना का फैलाव

उन्होंने कहा, ‘‘हमने शहरी इलाकों से आदिवासी हाट में व्यापारियों के प्रवेश को रोक दिया है. (फाइल फोटो)

उन्होंने कहा, ‘‘हमने शहरी इलाकों से आदिवासी हाट में व्यापारियों के प्रवेश को रोक दिया है. (फाइल फोटो)

अर्जुन मुंडा (Arjun Munda) ने आदिवासी युवकों के लिये एक डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम का ऑनलाइन उदघाटन करने के दौरान संवाददातओं से कहा, ‘‘हमारे पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक आदिवासी इलाकों में कोरोना वायरस संक्रमण के कम मामले आए हैं.

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नई दिल्ली. केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा (Arjun Munda) ने शुक्रवार को कहा कि उनका मंत्रालय आदिवासी आबादी के बीच कोरोना वायरस (Corona virus) संक्रमण के मामलों का पता लगाने पर विशेष ध्यान दे रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीय समुदायों में इस महामारी को फैलने से रोकने के लिये आवश्यक कदम उठाये गये हैं. मंत्रालय ने कहा कि भारत की आदिवासी आबादी (Tribal population) का एक बड़ा हिस्सा प्रवासी है और ये लोग लॉकडाउन के चलते अपने घर लौट रहे हैं. आकलन के मुताबिक, 10.4 करोड़ आदिवासी आबादी का 55 प्रतिशत हिस्सा अपने मूल निवास क्षेत्र से बाहर रहता है.

मुंडा ने आदिवासी युवकों के लिये एक डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम का ऑनलाइन उदघाटन करने के दौरान संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारे पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक आदिवासी इलाकों में कोरोना वायरस संक्रमण के कम मामले आए हैं. हालांकि, हम अब तक सामने आये मामलों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. राज्य एवं केंद्र शासित क्षेत्र इन मामलों की नियमित रूप से निगरानी कर रहे हैं.’’

हाट में व्यापारियों के प्रवेश को रोक दिया है
उन्होंने कहा, ‘‘हमने शहरी इलाकों से आदिवासी हाट में व्यापारियों के प्रवेश को रोक दिया है. आशा कार्यकर्ता विशेष रूप से जोखिम ग्रस्त आदिवासी समूहों में साफ-सफाई, स्वच्छता और दो गज दूरी के बारे में जागरूकता पैदा कर रही हैं.’’
वीडियो कांफ्रेंस के जरिये बैठकें की हैं


मंत्री ने कहा कि उन्होंने खुद राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के साथ इस मुद्दे पर वीडियो कांफ्रेंस के जरिये बैठकें की हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मेघालय में करीब 2,000 आदिवासी छात्र अपने-अपने गांवों में लौटे हैं, जबकि 15,000 छात्र नगालैंड लौटे हैं...आदिवासी प्रवासी भी लौट रहे हैं.’’

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