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बाबूलाल दलबदल मामला: झारखंड हाईकोर्ट में कल महत्वपूर्ण सुनवाई, विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने पक्ष रखने की मांगी इजाजत

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी (फाइल फोटो)
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी (फाइल फोटो)

यह मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच गया. मगर सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि इस मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High court) में हो रही है.

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रांची. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी से जुड़े दलबदल मामले में  झारखंड हाईकोर्ट में कल होने वाले सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में यह केस दूसरे नंबर पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है. इधर विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने हाईकोर्ट में सोमवार को हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर कोर्ट में पक्ष रखने की गुहार लगाई है. यदि हाईकोर्ट द्वारा इनको अनुमति दे दी जाती है तो मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष वकील के माध्यम से प्रदीप यादव और बंधु तिर्की भी इस मामले में अपना पक्ष रखेंगे.

इस मामले में हाईकोर्ट में 13 और 14 जनवरी को लगातार दो दिनों तक सुनवाई के बाद कोर्ट ने 19 जनवरी की तारीख सुनवाई के लिए मुकर्रर की थी. पिछली सुनवाई के दौरान झारखंड विधानसभा की ओर से जाने माने वकील कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा था. वहीं बाबूलाल मरांडी की ओर से झारखंड हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट आरएन सहाय ने पक्ष रखा था. सुनवाई के दौरान स्पीकर की ओर से कपिल सिब्बल ने कोर्ट के समक्ष शपथपत्र दाखिल कर स्वत संज्ञान पर आगे कारवाई नहीं करने की बात कही थी. वहीं हाईकोर्ट के निर्देश पर बाबूलाल मरांडी की ओर से रिज्वाइंडर कोर्ट के समक्ष दाखिल किया गया था. दोनों पक्षों की दलील के बाद सुनवाई के लिए कोर्ट ने अगली सुनवाई 19 जनवरी को निर्धारित की थी.

स्पीकर कोर्ट के स्वत: संज्ञान को हाईकोर्ट में चुनौती 



गौरतलब है कि बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने दसवीं अनुसूची के तहत विधानसभा न्यायाधीकरण द्वारा लिये गये स्वत: संज्ञान को चुनौती देते हुए विधानसभा के 2006 के निहर्ता नियमावली का हवाला दिया. दरअसल विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विधानसभा न्यायाधीकरण में स्वत संज्ञान लेते हुए कांड दर्ज कर नोटिस जारी किया गया था जिसकी संख्या 01/2020 है. जिसके खिलाफ बाबूलाल मरांडी द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई थी. इस पर हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर को सुनवाई करते हुए तत्काल कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. मगर सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में हो रही है. इधर हाईकोर्ट की रोक के बाद स्पीकर के समक्ष अब तक पांच याचिका बाबूलाल मरांडी पर दलबदल का आरोप लगाते हुए दाखिल किया गया है. जिसपर स्पीकर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए बाबूलाल मरांडी को फिर नोटिस जारी किया है.
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