रांची: भाप से लेकर RTPCR, जानें बिरसा जैविक उद्यान में कोरोना से बचाव की तैयारियां

संक्रमण से जंगली जानवरों को बचाने के लिए प्रबंधन हर संभव कोशिश करने में जुटा है.

संक्रमण से जंगली जानवरों को बचाने के लिए प्रबंधन हर संभव कोशिश करने में जुटा है.

बिरसा जैविक उद्यान के डायरेक्टर यतींद्र कुमार दास ने बताया कि जंगली जानवरों में संक्रमण की आशंका को देखते हुए दिन में दो बार जानवरों का निरीक्षण किया जा रहा है. संक्रमण की स्थिति में जानवरों को स्किविज पिंजरे में बंद करके उनके नाक और मुंह स्वाब लेकर RTPCR जांच की भी पूरी तैयारी है.

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रांची. कोरोना का संक्रमण आम आदमी के साथ जानवरों के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है. ऐसे में रांची के बिरसा जैविक उद्यान में जंगली जानवरों को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. जू में जानवरों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद प्रबंधन संक्रमण को रोकने में अबतक कामयाब रहा है. कोरोना संक्रमण काल में रांची के बिरसा जैविक उद्यान का नजारा भी बदला बदला नजर आ रहा है. संक्रमण से जंगली जानवरों को बचाने के लिए प्रबंधन हर संभव कोशिश करने में जुटा है. दरअसल संक्रमण से मांसाहारी जानवरों को ज्यादा खतरा है. ऐसे में बाघ, शेर, तेंदुए समेत दूसरे जंगली मांसाहारी जानवरों को संक्रमण से बचाने के लिए युद्धस्तर पर कोशिशें योजनाबद्ध तरीके से जारी हैं.

बिरसा जैविक उद्यान के वन क्षेत्र पदाधिकारी रामचंद्र पासवान ने बताया कि 104 हेक्टेयर यानी 256 एकड़ से ज्यादा में फैले बिरसा जू में 1498 वन्य प्राणी हैं जिनमें शाकाहारी और मांसाहारी जानवरों की संख्या 654 है. रेप्टाइल की संख्या 115 और कुल पक्षियों की संख्या 729 है. संक्रमण से जंगली जानवरों को बचाने के लिए मल्टी लेयर सुरक्षा व्यवस्था की गई है. बिरसा जू के पशु चिकित्सक डॉ. ओमप्रकाश साहू ने जानकारी देते हुए बताया कि जू में संक्रमण से बचाव को लेकर तमाम तरह के उपाय किए जा रहे हैं:

- बिरसा जो में प्रवेश द्वार से ही सैनिटाइजर और थर्मल करने की व्यवस्था

- जंगली जानवरों के बाड़े में प्रवेश करने से पहले पोटैशियम परमैग्नेट के घोल से हाथ और पैर धोना
- केज में घुसने से पहले जानवरों के व्यवहार और उनके स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग करना

- हफ्ते में एक दिन केज के लोहे को गैस गन के फ्लेम से सेनीटाइज करना ताकि संक्रमण हीट से खत्म हो जाए

- केज के बाहर हर दिन सोडियम हाइड्रोक्लोराइड और प्रोटेक्शिल दवा का छिड़काव करना



- मांसाहारी जानवरों को उबालकर मांस देना ताकि कोई भी संक्रमण हीट से खत्म हो जाए

- संक्रमण के देखते हुए जानवरों को मांस का सूप दिया जा रहा है.

- शाकाहारी जानवरों और पक्षियों को फल और सब्जियों को पोटैशियम परमैग्नेट के घोल से धोकर दिया जा रहा है.

- संक्रमित होने की स्थिति में जंगली जानवरों के RTPCR जांच की भी मुकम्मल व्यवस्था

बिरसा जैविक उद्यान में बाघिन अनुष्का एक मुख्य आकर्षण का केंद्र है. अनुष्का के पांच मादा शावक भी अब वयस्क हो चले हैं. ऐसे में उन सभी का विशेष ख्याल रखा जा रहा है. बिरसा जू में कुल चार शेर हैं जिनमें में दो मादा और दो नर हैं. वहीं बाघों की संख्या 10 है जिनमें तीन नर और 7 मादा हैं. इसके अलावा 8 तेंदुए भी हैं. इन सभी जंगली जानवरों की सेहत, उनके स्वास्थ और मौसम को देखते हुए उनके लिए कूलर समेत तमाम दूसरी व्यवस्था की गई है.

बिरसा जैविक उद्यान के डायरेक्टर यतींद्र कुमार दास ने बताया कि जंगली जानवरों में संक्रमण की आशंका को देखते हुए दिन में दो बार जानवरों का निरीक्षण किया जा रहा है. संक्रमण की स्थिति में जानवरों को स्किविज पिंजरे में बंद करके उनके नाक और मुंह स्वाब लेकर RTPCR जांच की भी पूरी तैयारी है. जानवरों के लिए मौके पर ही स्टीम (भाप) की व्यवस्था भी की गई है.

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