विधानसभा चुनाव: क्या झारखंड में जेडीयू बिगाड़ सकती है बीजेपी का गेम?

बिहार के सीएम नीतीश कुमार (NITISH KUMAR) ने कहा, 'झारखंड (JHARKHAND) में भी पूर्ण शराबबंदी (complete liquor prohibition) कानून लागू करने की जरूरत है. यह कितनी खराब बात है कि बिहार में जो लोग शराब पीना चाहते हैं वे लोग शराब पीने के लिए झारखंड चले आते हैं.'

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: September 8, 2019, 6:03 PM IST
विधानसभा चुनाव: क्या झारखंड में जेडीयू बिगाड़ सकती है बीजेपी का गेम?
बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अपने ही सहयोगी दल बीजेपी पर इशारों-इशारों में तंज कसा है.
Ravishankar Singh
Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: September 8, 2019, 6:03 PM IST
रांची. बिहार (BIHAR) के सीएम नीतीश कुमार (NITISH KUMAR) ने अपने ही सहयोगी दल बीजेपी (BJP) पर इशारों-इशारों में तंज कसा है. शनिवार को रांची (RANCHI) में पार्टी के राज्य स्तरीय सम्मेलन में बोलते हुए नीतीश कुमार ने कहा है कि पिछले 19 सालों से झारखंड में ज्यादातर एक ही पार्टी की सरकार रही है. इसके बावजूद विकास में राज्य पिछड़ गया है. नीतीश कुमार ने कहा, 'उन्हें अक्सर यह सोचकर आश्चर्य होता है कि जिस उम्मीद के साथ 19 साल पहले राज्य का गठन हुआ था, आज 19 साल बाद भी झारखंड आगे नहीं बढ़ पाया. राज्य के बंटवारे के वक्त बिहार के लोग इसलिए मायूस थे कि खनिज संपदा झारखंड में चला गया और झारखंड के लोग बंटवारे के फैसले से खुश थे. उस वक्त सभी को लग रहा था कि झारखंड विकास की दौड़ में आगे निकल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका.' उन्होंने कार्यकर्ताओं से सवाल किया कि ऐसा क्यों नहीं हुआ, जबकि बिहार ने कम संसाधन के बावजूद विकास की रफ्तार पकड़ रखी है.

जेडीयू अपने दम पर चुनाव लड़ेगी
जेडीयू (JDU) के इस राज्य स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में नीतीश कुमार ने झारखंड विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Election 2019) को देखते हुए बड़ा बयान भी दिया. कुमार ने कहा, 'झारखंड में भी पूर्ण शराबबंदी कानून लागू करने की जरूरत है. यह कितनी खराब बात है कि बिहार में जो लोग शराब पीना चाहते हैं, वे लोग शराब पीने के लिए झारखंड चले आते हैं. बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी जनता के बीच में शराबबंदी के मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की जरूरत है.'

झारखंड में भी पूर्ण शराबबंदी की जरूरत

नीतीश कुमार ने झारखंड की बीजेपी सरकार और उसके मुखिया रघुवर दास का नाम नहीं लेते हुए कहा कि झारखंड में भी पूर्ण शराबंदी की आवश्यकता है. कुमार ने जेडीयू कार्यकर्ता सम्मेलन में झारखंड के विकास के लिए पांच मंत्र भी सुझाए, सीएनटी-एसपीटी एक्ट में छेड़छाड़ न हो, राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू हो, क्षेत्रीय विकास की रणनीति बनाने की जरूरत, पिछड़ों एवं अति पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था और अल्पसंख्यकों के विकास को लेकर तेजी से काम करना.

नीतीश कुमार ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 19 सालों में झारखंड में कोई काम नहीं हुआ है.

नीतीश कुमार ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 19 सालों में झारखंड में कोई काम नहीं हुआ है.
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बीजेपी से जेडीयू का गठबंधन सिर्फ बिहार तक 
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार झारखंड में अपनी पार्टी की मौजूदगी का एहसास जोरदार तरीके से कराना चाहते हैं. यह इसलिए भी कि क्योंकि हाल के दिनों में उनको बीजेपी की तरफ से उस तरह से तवज्जो नहीं मिली है, जैसे पहले मिला करती थी. मोदी के दूसरे कार्यकाल में शपथ ग्रहण के दिन से ही जेडीयू और बीजेपी में खटास नजर आने लगी थी, जब नीतीश कुमार ने केंद्र में मंत्री पद की एक सीट लेने से इनकार कर दिया था. इस घटना के बाद से ही दोनों पार्टियों के बीच खटास पैदा शुरू हो गई थी. इस घटना के बाद जेडीयू के कई नेताओं ने कड़े बयान दिए थे. इसी का नतीजा था कि पीएम मोदी के शपथ ग्रहण के एक सप्ताह बाद ही बिहार मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया. इस मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी कोटे से एक भी मंत्री को शपथ नहीं दिलाई गई थी.

जेडीयू झारखंड में जड़ जमाने की कोशिश में लगातार लगी हुई है
जेडीयू झारखंड में जड़ जमाने की कोशिश में लगातार लगी हुई है


बता दें, जेडीयू झारखंड में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश में लगातार लगी हुई है. सात सितंबर को रांची में झारखंड जेडीयू द्वारा कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें नीतीश कुमार ने न केवल संगठन मजबूती को लेकर कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं को टिप्स दिए बल्कि चुनावी शंखनाद का भी ऐलान किया. कुछ दिन पहले भी जेडीयू ने रांची में अपने कार्यकर्ताओं को बुलाकर चुनाव लड़ने को लेकर योजना बनाई थी. इस बैठक में ये कोशिश की गई थी कि राज्य में गैर भाजपा और गैर कांग्रेसी सरकार के विकल्प के तौर पर जेडीयू एक मजबूत दावेदार के तौर पर सामने आए.

नीतीश कुमार के दौरे के बाद राजनीति शुरू
जेडीयू की इस बैठक के बाद झारखंड की राजधानी रांची से लेकर बिहार की राजधानी पटना तक राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. नीतीश कुमार के झारखंड दौरे पर अब सियासत भी शुरू हो गई है. झारखंड के सीएम रघुवर दास ने भी इशारों-इशारों में बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा है कि सबको नेता बनने का अधिकार है. लेकिन मैं विरोधियों को बता दूं, इस बार झारखंड की जनता ने मूड बना लिया है ,अबकी बार 65 पार है.

झारंखंड की राजधानी रांची से लेकर बिहार की राजधानी पटना तक राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं
झारंखंड की राजधानी रांची से लेकर बिहार की राजधानी पटना तक राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं


बिहार बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने भी नीतीश कुमार के दौरे पर कहा, 'जिसको जो सोचना है सोचे, जो बोलना है बोले. लेकिन, देश मे नरेंद्र मोदी का विकल्प नहीं है. विदेश में भी चुनावों में लोग मोदी का पोस्टर लगा रहे हैं. मोदी की विश्व में प्रशंसा हो रही है. मोदी का विकल्प कहां है? बीजेपी बड़ी पार्टी है, अपने सभी सहयोगियों को साथ में लेकर चलती है.'

कुल मिलाकर एक तरफ नीतीश कुमार बिहार मॉडल की बात करते नहीं अघाते हैं, लेकिन यह सच्चाई है कि झारखंड में जेडीयू संगठनात्मक तौर पर काफी कमजोर है. सालखन मुर्मू कुछ माह पहले ही प्रदेश अध्यक्ष बने हैं. जिलों में जेडीयू का कोई मजबूत संगठन नहीं है. ऐसे में असली और दमदार नेताओं की पहचान करना, उनके लिए चुनौती से कम नहीं है. ऐसे में क्या जेडीयू को सभी 81 सीटों पर चुनाव जिताऊ नेता मिल पाएंगे और क्या जेडीयू सिर्फ वोट काटने के लिए ही झारखंड में उतरेगी यह बड़ा सवाल है?

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First published: September 8, 2019, 4:39 PM IST
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