Bihar Election 2020: 'छड़ी' चुनाव चिह्न के साथ बिहार चुनाव में जायेगी 'गुरुजी' की पार्टी

झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन, जिन्हें गुरुजी भी कहा जाता है. (फाइल फोटो)
झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन, जिन्हें गुरुजी भी कहा जाता है. (फाइल फोटो)

झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha) को चुनाव आयोग (Election Commission) ने बिहार में 'छड़ी' चुनाव चिह्न दिया है.

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रांची. झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha) को चुनाव आयोग (Election Commission) ने बिहार में 'छड़ी' चुनाव चिह्न दिया है. झारखंड की सत्त्ताधारी और सबसे बड़ी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) अब बिहार विधानसभा चुनाव तीर धनुष की जगह छड़ी चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी. यूनाइटेड बिहार के समय ही रजिस्टर्ड पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा का चुनाव  चिह्न "तीर धनुष" था और इसी चुनाव चिह्न के साथ पार्टी झारखंड के अलावा बिहार, बंगाल, ओडिशा और अन्य राज्यों में चुनाव मैदान में उतरती रही, पर जदयू के आपत्ति पर चुनाव आयोग ने बिहार में जेएमएम का चुनाव चिह्न तीर धनुष को सीज कर दिया था.

2019 के लोकसभा चुनाव नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (चुनाव चिह्न-तीर) ने एक समान चुनाव चिह्न के चलते मतदाताओं में भ्रम की स्थिति होने और मत प्रभावित होने की बात कही थी. इसको लेकर चुनाव आयोग में आवेदन देकर आग्रह किया कि झामुमो चूंकी मूल रूप से झारखंड की क्षेत्रीय पार्टी है और बिहार में उसका कोई खास जनाधार नहीं है. इसलिए जेएमएम का चुनाव चिह्न 'तीर-धनुष' को सीज कर दिया जाए. सुनवाई के बाद जदयू की दलील को सही मानते हुए चुनाव आयोग ने बिहार में झामुमो का चुनाव चिह्न तीर धनुष को सीज कर दिया था.

झामुमो ने भी की थी आपत्ति
जदयू की चाल को उसी अंदाज में जवाब देते हुए झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 से पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चुनाव आयोग के सामने जदयू जैसा दलील देकर झारखंड में जदयू के चुनाव चिह्न सीज करने की मांग कर दी, जिसके बाद झारखंड में चुनाव आयोग ने जदयू के तीर चुनाव चिह्न को सीज कर उसे ट्रैक्टर पर बैठा किसान चुनाव चिह्न अलॉट किया था. अब जब बिहार में विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा हो गयी है तो निर्वाचन आयोग ने जेएमएम को बिहार में छड़ी चुनाव चिह्न अलॉट किया है.
महागठबंधन से चर्चा


पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार झामुमो बिहार के उन विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने का मन बना रहा है. जहां अनुसूचित जनजाति की संख्या अच्छी है. बिहार के बांका, मुंगेर, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज गया सहित कई जिलों में ऐसी सीटों को झामुमो ने चिह्नित कर रखा है, पर अभी भी झारखंड के मुख्यमंत्री और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमन्त सोरेन की इच्छा महागठबंधन के हिस्सा बनकर बिहार चुनाव में जाने का है.

चुनाव चिह्न बदलने से क्या पड़ेगा असर
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के साथ 'तीर-धनुष" चुनाव चिह्न जनता के बीच पहचान बना चुका है. ऐसे में नए चुनाव चिह्न को बिहार में जेएमएम की पहचान बनाने के लिए नेताओं को काफी मेहनत करना होगा. पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्या जहां 'छड़ी' को गुरुजी की बताते हुए कहते हैं कि बिहार के विकास की नई कहानी लिखने और जदयू-बीजेपी की गरीब,आदिवासी और पिछड़ा विरोधी सरकार को हटाने में पथ प्रदर्शक बनेगा वहीं पार्टी में खासा स्थान रखने वाले विनोद पांडेय मानते हैं कि चुनाव चिह्न बदलने का असर तो पड़ेगा पर पार्टी नेताओं के मेहनत से इस नुकसान को कम करने की पूरी कोशिश होगी.
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