बिरसा मुंडा की पड़पोती जीना बोलीं- हम सब्जी लगाते हैं, ताकि अच्छी आमदनी हो जाए लेकिन...

बिरसा मुंडा की परपोती जानी मुंडा सब्जी बेचकर कर रही हैं जीवन यापन.

बिरसा मुंडा की परपोती जानी मुंडा सब्जी बेचकर कर रही हैं जीवन यापन.

जानी मुंडा बताती हैं कि जीवनयापन के लिए हम लोग सब्जी लगाते हैं, ताकि अच्छी आमदनी हो जाए, जिससे हमारी पढ़ाई के खर्च के साथ-साथ घर का भी खर्च निकल सके. लेकिन लॉकडाउन की वजह से उचित कीमत नहीं मिल रही है.

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रांची. झारखंड के लोगों के बीच बिरसा मुंडा का नाम बड़े आदर और श्रद्धा के साथ लिया जाता है. झारखंड के तमाम नेता भले ही वे किसी भी पार्टी के हों, बिरसा मुंडा के नाम को नजरअंदाज कर झारखंड की राजनीति में अपना अस्तित्व नहीं बचा सकते. बिरसा मुंडा के नाम पर झारखंड में लोगों की मदद के लिए या झारखंड के विकास के लिए कई योजनाएं हैं. लेकिन यह बेहद आश्चर्य की बात है कि इन योजनाओं का लाभ आज तक बिरसा मुंडा के परिवार तक नहीं पहुंच पाया. बिरसा मुंडा का परिवार आज जीवन बसर के लिए संघर्ष कर रहा है. बिरसा मुंडा की जन्मभूमि है उलिहातू. यहां कुछ ही दूरी पर अपने खेत से सब्जी तोड़कर नजदीक की सब्जी मंडी में बेचकर अपना घर और परिवार का खर्च चला रही हैं उनकी परपोती जानी मुंडा.

लॉकडाउन में सब्जियों की उचित कीमत नहीं मिल रही

बिरसा मुंडा की जन्मस्थली से मात्र 200 मीटर की दूरी पर रहती हैं बिरसा मुंडा की परपोती जानी मुंडा. वे और उनकी भाभी गांगी मुंडा अपने खेत में सब्जियां उगाती हैं. फिलहाल उन्होंने खेत में बैंगन, मिर्च, कद्दू, शकरकंद, नेनुआ और मकई लगा रखा है. जानी मुंडा बताती हैं कि जीवनयापन के लिए हमलोग सब्जी की फसल लगाते हैं, ताकि अच्छी आमदनी हो जाए, जिससे हमारी पढ़ाई के खर्च के साथ-साथ घर का भी खर्च निकल सके. लेकिन लॉकडाउन की वजह से उचित कीमत नहीं मिल रही है. मजबूरी में हम सस्ते दामों पर सब्जी बेच रहे हैं. जानी मुंडा बताती हैं कि कटहल और आम के पेड़ भी हैं हमारे खेत में. उनके फल भी हम बेचते हैं.

दूषित पानी पीकर होती है तबीयत खराब
अपने खेत से निकलकर जानी मुंडा और गांगी मुंडा हमें अपने घर के रास्ते में कुआं पर लेकर आईं. उन्होंने बताया कि यहीं से वे खाना बनाने और पीने के लिए पानी ले जाती हैं. जानी मुंडा की भाभी गांगी मुंडा कहती हैं कि चापाकल खराब होने की वजह से हमलोग यही कुआं का पानी पीते हैं. कुआं की तरफ इशारा करते हुए कहती हैं कि बरसात में पानी ऊपर आ जाता है. पानी साफ भी नहीं है. मजबूरी में हमलोग इसी पानी को पीने के लिए विवश हैं. कई बार हमलोग की तबीयत भी खराब हो जाती है.

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