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दूसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतार बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव को बनाया रोचक

दूसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतार बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव को बनाया रोचक

राज्यसभा चुनाव: बीजेपी ने उतारे दो उम्मीदवार

राज्यसभा चुनाव: बीजेपी ने उतारे दो उम्मीदवार

झारखंड में राज्यसभा चुनाव में सत्ता और विपक्ष के बीच एक बार फिर शह और मात का खेल शुरू हो गया है. राज्य में दो सीटों के लिए भाजपा की ओर से प्रदीप संथालिया को भी चुनावी समर में उतार दिए जाने के बाद राज्यसभा चुनाव रोचक हो गया है.

    भाजपा द्वारा दूसरी सीट पर भी उम्मीदवार खड़ा कर दिए जाने से झारखंड का राज्यसभा चुनाव रोचक हो गया है. सत्ताधारी भाजपा जहां नामांकन के बाद अब अपने लिए विपक्ष के भी तीन वोट हासिल करने की कोशिश करेगा वहीं विपक्ष के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती महागठबंधन के सभी विधायकों को एकजुट रखने की होगी.

    झारखंड में राज्यसभा चुनाव में सत्ता और विपक्ष के बीच एक बार फिर शह और मात का खेल शुरू हो गया है. राज्य में दो सीटों के लिए भाजपा की ओर से प्रदीप संथालिया को भी चुनावी समर में उतार दिए जाने के बाद राज्यसभा चुनाव रोचक हो गया है. भाजपा को पूरी उम्मीद उन विधायकों से है जिन्होनें 2016 के राज्यसभा चुनाव में महेश पोद्दार को दूसरी वरीयता के वोट में जीत दिलाने में मदद की थी. मगर विपक्ष भाजपा की रणनीति को अनैतिक बता रहा है. इस बार बसपा के इकलौते विधायक शिवपूजन मेहता के समर्थन का दावा कर रहा है.

    झामुमो के एक विधायक की सदस्यता रद्द होने से 80 की संख्या वाले विधानसभा में प्रथम वरीयता से जीत का मैजिक आंकड़ा 27 का है. विपक्ष कांग्रेस, झामुमो, जेवीएम, मासस-माले के साथ साथ बसपा के उम्मीदवार के समर्थन से 30 विधायकों के अपने पक्ष में होने का दावा कर रहा है. पर कहीं न कहीं 2016 राज्यसभा चुनाव का वह दृश्य भी उसके जेहन में है जब ऐन वक्त पर झामुमो विधायक चमरा लिंडा बीमार हो गए थे और फिर एक मामले में उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. शायद यही वजह रही कि पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन ने खुद बैठक कर सभी विधायकों को एकजुट रहने का आदेश दे दिया. झामुमो नेता निर्वाचन आयोग को लिखकर स्वच्छ चुनाव संपन्न कराने के लिए एडीजी अनुराग गुप्ता को स्पेशल ब्रांच से हटाने की मांग की है.

    भाजपा द्वारा दूसरे सीट पर उम्मीदवार खड़ा कर देने के बाद विपक्ष के महागठबंधन के नेताओं को दो मोर्चों पर काम करना होगा. एक ओर जहां सभी दलों को अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखना होगा वहीं दूसरी ओर राज्यसभा के चुनावी खेल में हर एक दांव सोच समझकर खेलना होगा क्योंकि 2016 में झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के छोटे बेटे की दूसरी वरीयता के वोट में हुई हार झामुमो-कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के नेताओं को बखूबी याद होगा.

    Tags: झारखंड, रांची

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