मधुपुर उपचुनाव में बीजेपी को क्यों नहीं मिला अपना नेता, जिससे मिली थी हार उसी को बनाया प्रत्याशी

भारतीय जनता पार्टी. (file photo)

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सदस्यों की संख्या के हिसाब से बीजेपी दुनिया का सबसे बड़ा दल है, लेकिन झारखंड बीजेपी (Jharkhand BJP) अन्य दलों से आए नेताओं के भरोसे चल रही है.

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रांची. पैराशूट से उतारे गए उम्मीदवार के भरोसे है बीजेपी. कहने को तो भाजपा खुद को कैडर आधारित पार्टी बताती है. सदस्यों की संख्या के हिसाब से यह दुनिया का सबसे बड़ा दल है, लेकिन झारखंड बीजेपी (Jharkhand BJP) अन्य दलों से आए नेताओं के भरोसे चल रही है. भाजपा ने मधुपुर उपचुनाव में दूसरे को छोड़ तीसरे स्थान पर रहने वाले पर दांव लगाया है. इसकी मूल वजह मधुपुर के जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को बताया जाता है. पिछले दिनों भाजपा प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में मधुपुर चुनाव को लेकर विस्तार से मंथन हुआ था. प्रदेश चुनाव समिति में एनडीए को एकजुट रखने और वोटों के न बिखरने पर जोर दिया था.

साल 2019 में राज्य में हुए विधानसभा चुनावों में गंगा नारायण सिंह की वजह से ही बीजेपी को मधुपुर सीट पर करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी. गंगा नारायण ने 45000 से अधिक वोट हासिल किए थे, जिसकी वजह से बीजेपी प्रत्याशी राज पलिवार को हार का सामना करना पड़ा था. यहां से झामुमो के हाजी हुसैन अंसारी को जीत हासिल हुई थी. अब इस सीट पर हो रहे उपचुनाव में हाजी के बेटे हफीजुल अंसारी मैदान में हैं, उनके सामने भाजपा के गंगा नारायण होंगे.

क्या सरयू या फिर रविंद्र राय वाला तेवर अपनायेंगे पलिवार?

ये तो पुरानी बातें हैं. नयी बात यह है कि बीजेपी ने मधुपुर में राज पलिवार को दरकिनार कर गंगा नारायण सिंह को उम्मीदवार बनाया है. डर है कि कहीं बीजेपी का यह सियासी दांव उलटा न पड़े जाये. राज पलिवार का  क्या स्टैंड होगा, यह अबतक क्लीयर नहीं हो सका है. वे रविंद्र राय वाला तेवर अपनाते हैं या सरयू राय वाला, देखना दिलचस्प होगा. अगर सरयू राय वाले तेवर में आये तो बीजेपी को नुकसान हो सकता है.
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