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पढ़ें, झाविमो के 'विनाश' के लिए भाजपा का 'सीक्रेट प्‍लान'

झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के छह विधायकों के टूटने की तैयारी बड़े ही गोपनीय तरीके से हुई थी। भाजपा में विलय के लिए इन छह विधायकों को पहले विधानसभा में अलग गुट की मान्यता दी जाएगी। इसके बाद इनका विलय भाजपा में होगा।

झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के छह विधायकों के टूटने की तैयारी बड़े ही गोपनीय तरीके से हुई थी। भाजपा में विलय के लिए इन छह विधायकों को पहले विधानसभा में अलग गुट की मान्यता दी जाएगी। इसके बाद इनका विलय भाजपा में होगा।

झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के छह विधायकों के टूटने की तैयारी बड़े ही गोपनीय तरीके से हुई थी। भाजपा में विलय के लिए इन ...अधिक पढ़ें

    झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के छह विधायकों के टूटने की तैयारी बड़े ही गोपनीय तरीके से हुई थी। भाजपा में विलय के लिए इन छह विधायकों को पहले विधानसभा में अलग गुट की मान्यता दी जाएगी। इसके बाद इनका विलय भाजपा में होगा।

    फिलहाल, रघुवर सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार में देरी का यही कारण रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के आला नेताओं ने झाविमो को भाजपा में विलय का ऑफर दिया था। झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी को दिल्ली बुलाकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बातचीत की थी। लेकिन बाबूलाल मरांडी पार्टी के विलय के लिए तैयार नहीं हुए। उनके दल के नेता प्रदीप यादव और कुछ विधायक उस समय विलय के लिए तैयार नहीं थे। बाहर से समर्थन देने के लिए झाविमो नेता तैयार थे।

    भाजपा के नेतृत्व में झारखंड में सरकार चल रही है। आजसू इसका सहयोगी दल है। आजसू के दबाव से बाहर निकलने के लिए भाजपा की यह रणनीति थी कि विलय करा लेने से भाजपा का विधानसभा में आंकड़ा 45 हो जाता, जिससे आजसू की मनमानी उसे झेलनी नहीं पड़ती।
    झाविमो के सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी के विलय के लिए तैयार नहीं होने पर भाजपा ने अलग रणनीति तैयार की। दो तरफ चारा फेंका गया। झाविमो के विधायकों को तोड़ने की वन टू वन तैयारी हुई। इसमें भाजपा को सफलता मिली।

    उधर, कांग्रेस को भी तोड़ने की तैयारी एक समान चल रही थी। सत्ता में साझीदारी के लिए बारगेन हुए। कांग्रेस के चार विधायक भाजपा में आने को तैयार थे, लेकिन एक के बिदल जाने से यह मामला नहीं बन पाया।

    लिहाजा, झाविमो के लिए जो गेम प्लान था, वह कामयाब हो गया। झाविमो के छह विधायक सोमवार को ही पार्टी से अलग होने की कवायद शुरू कर दी। झाविमो ने इनमें से चार को निलंबित कर दिया।

    नवीन जायसवाल, अमर बावरी, आलोक चौरसिया, जानकी यादव, गणेश गंझू और रणधीर ने अलग गुट की मान्यता देने के लिए विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव को पत्र दिया है। वे सत्ता पक्ष में एक गुट के रूप में मान्यता चाहते हैं।

    झारखंड विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव कानूनी मशविरा ले रहे हैं, लेकिन यह पूरी संभावना है कि इस गुट को सत्ता पक्ष में बैठने की मान्यता दे देंगे। इसके बाद रघुवर दास मंत्रिमंडल का विस्तार होगा।

    राज्यपाल डॉक्‍टर सैयद अहमद राष्ट्रपति की ओर से बुलाए गये सम्मेलन में भाग लेने दिल्ली गये हैं। वहां से आने के बाद रघुवर दास सरकार का विस्तार होगा। पहले यह 11 फरवरी तक होना था, लेकिन झाविमो विधायकों के पूरे के पूरे छह की संख्या में टूटने में विलंब होने से यह तिथि टल गयी।

    अब राज्यपाल 13 फरवरी को रांची आ रहे हैं। तब मंत्रिमंडल विस्तार का कार्यक्रम होगा। झाविमो से आये विधायकों में से एक को मंत्री पद दिया जाएगा।

    नवीन जायसवाल के मंत्री बनने की संभावना है। दूसरी तरफ आजसू इससे नाराज है। उसे अपना हक घटने का खतरा महसूस हो रहा है। झाविमो को तोड़ने के लिए भाजपा के तीन नेता पूरी भूमिका तैयार किये। दिल्ली और हैदराबाद में यह बातचीत हुई है। उसके बाद ये विधायक तैयार हुए हैं।

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    Tags: Babulal marandi, BJP

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