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बजट काउंट डाउन : जीएसडीपी से प्रति व्यक्ति आय तक में उछाल की उम्मीद

बजट काउंट डाउन : जीएसडीपी से प्रति व्यक्ति आय तक में उछाल की उम्मीद

झारखंड की रघुवर सरकार का अगले वित्तीय वर्ष का बजट कैसा होगा, इसको लेकर उत्सुकता है. सरकार ने पिछले साल जेंडर बजट की शुरूआत की है. कृषि के लिए भी खास आवंटन किया गया. इस बार गरीब कल्याण के लिए खासतौर पर बजट बनेगा. कई योजनाएं नई शुरू होंगी तो कुछ बंद होंगी.

झारखंड की रघुवर सरकार का अगले वित्तीय वर्ष का बजट कैसा होगा, इसको लेकर उत्सुकता है. सरकार ने पिछले साल जेंडर बजट की शुरूआत की है. कृषि के लिए भी खास आवंटन किया गया. इस बार गरीब कल्याण के लिए खासतौर पर बजट बनेगा. कई योजनाएं नई शुरू होंगी तो कुछ बंद होंगी.

झारखंड की रघुवर सरकार का अगले वित्तीय वर्ष का बजट कैसा होगा, इसको लेकर उत्सुकता है. सरकार ने पिछले साल जेंडर बजट की शुरूआत की है. कृषि के लिए भी खास आवंटन किया गया. इस बार गरीब कल्याण के लिए खासतौर पर बजट बनेगा. कई योजनाएं नई शुरू होंगी तो कुछ बंद होंगी.

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    झारखंड की रघुवर सरकार का अगले वित्तीय वर्ष का बजट कैसा होगा, इसको लेकर उत्सुकता है. सरकार ने पिछले साल जेंडर बजट की शुरूआत की है. कृषि के लिए भी खास आवंटन किया गया. इस बार गरीब कल्याण के लिए खासतौर पर बजट बनेगा. कई योजनाएं नई शुरू होंगी तो कुछ बंद होंगी.

    2011-12 आधार वर्ष

    झारखंड की रघुवर सरकार का तीसरा बजट 23 जनवरी को सदन में पेश होगा. योजना एवं वित्त विभाग इसे अंतिम रूप देने में लगा हुआ है. सरकार की ओर से आर्थिक सर्वेक्षण भी पेश किया जाएगा. इस बार से सरकार ने विकास दर के निर्धारण का आधार वर्ष बदल दिया है. पहले यह 2004-05 हुआ करता था. अब 2011-12 आधार वर्ष माना गया है. इससे सरकार के सेक्टोरल ग्रोथ में अद्यतन स्थिति आ रही है.

    जीएसडीपी 12 प्रतिशत से अधिक

    संकेत है कि जीएसडीपी 12 प्रतिशत से अधिक होगी. प्रति व्यक्ति आय में 7 फीसदी की वृद्धि के संकेत हैं. आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्ष से विकास की रफ्तार को गति मिली है. 2015-16 के आंकड़े बताते हैं कि कृषि में 16.1 ,मत्स्य पालन में 9, निर्माण क्षेत्र में 11, ऊर्जा क्षेत्र में 12.4 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है. राज्य सरकार की आर्थिक नीति की समीक्षा करने वाले अर्थशास्त्री कहते हैं कि सरकार इस बजट में गरीबों के लिए योजनाएं ला सकती हैं. बकौल अर्थशास्त्री प्रो हरीश्वर दयाल, जिस तरह से बजट में लोगों की सहभागिता बढ़ी है और जनकल्याणकारी योजनाएं हाल के वर्षों में आयी हैं, उम्मीद की जा रही है कि गरीबों के कल्याण खास योजनाएं इस बजट में होंगी.  सरकार ने बजट बनाने से पहले जगह-जगह संगोष्ठी कर लोगों और संस्थाओं से उनकी योजनाओं के संबंध में सलाह ली है. यह परंपरा पिछले साल से शुरू हुई है. इसलिए इसे कंसलटेटिव बजट भी कहा जाता है. कुछ योजनाओं को बंद करने के भी संकेत हैं. महिला व स्कूली बच्चों के लिए भी आने वाले बजट में विशेष व्यवस्था की जाएगी.

    अधिक स्वायत्तता और सामर्थ्य

    सरकार इस बजट में टैक्स में सुधारात्मक उपाय करने की योजना ला सकती है. सरकार के पास पैसा पिछले साल की तुलना में अधिक है. रॉयल्टी से भी खजाना भरा है.  चौदहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार केंद्रीय करों में हिस्सेदारी पिछले साल से ही 10 प्रतिशत बढ़ी है. केंद्र प्रायोजित योजना में कमी आयी है. राज्य सरकार को वित्तीय क्षेत्र में अधिक स्वायत्ता मिली है. राज्य सरकार के मंत्री सरयू राय कहते हैं कि बजट में कुछ नया और कुछ पुराना होता रहता है. बकौल सरयू राय, उन्होंने भी गरीबों के लिए पर्व पर आधारित खास योजना लाने का सुझाव सरकार को दिया है. धोती-साड़ी योजना को भी उन्होंने बेहतर करार दिया और फिर शुरू करने की बात कही.

    बहरहाल वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए रघुवर के पिटारे में क्या कुछ है, यह 23 जनवरी को पता चलेगा. उम्मीद है कि इस बार का बजट लगभग 60 हजार करोड़ रुपए का होगा. इसमें योजना मद में पर अधिक राशि खर्च होगी.

    ( रांची से राजेश कुमार की रिपोर्ट)

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