झारखंड विधानसभा का बजट सत्र समाप्त, मंत्री बोले- DVC के साथ एग्रीमेंट पर लेंगे ठोस निर्णय

झारखंड विधानसभा का बजट सत्र मंगलवार को समाप्त हो गया.

झारखंड विधानसभा का बजट सत्र मंगलवार को समाप्त हो गया.

Jharkhand Assembly: जेएमएम विधायक सरफराज अहमद ने कहा कि DVC जिस एग्रीमेंट का हवाला देकर झारखंड का हक मार रही है, वो ना तो बिहार के पास है और ना ही पश्चिम बंगाल के पास. ऐसे में नए एग्रीमेंट करने की ज़रूरत है.

  • Share this:
रांची. झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को JPSC, DVC और जमीन की ऑनलाइन मैपिंग में त्रुटि का मुद्दा छाया रहा. इसके अलावा क्षेत्रीय भाषा शिक्षकों के खाली पड़े पदों पर नियुक्ति के मुद्दे पर भी विधायकों ने सरकार की मंशा जाननी चाही. शिक्षा को लेकर विधायकों की गंभीरता सदन में देखने को मिली.

मंगलवार को सदन में क्षेत्रीय भाषा के रिक्त पड़े पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति , उर्दू शिक्षकों की बहाली और सबसे महत्वपूर्ण JPSC नियमावली पर सदन में काफी देर तक चर्चा होती रही. ध्यानाकर्षण के माध्यम से बीजेपी के अमित मंडल ने JPSC की नियमावली में एवरेज शब्द पर आपत्ति जताई. उन्होंने सरकार से पास इन ईच पेपर की मांग की. विधायक की इस मांग पर संसदीय कार्य मंत्री ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया.

सदन में फिर से एक बार DVC का मुद्दा छाया रहा. ध्यानाकर्षण के दौरान जेएमएम के सरफराज अहमद ने 1948 में हुए एग्रीमेंट का कहीं अता-पता नहीं होने की बात कही. सरफराज अहमद ने कहा कि DVC जिस एग्रीमेंट का हवाला देकर झारखंड का हक मार रही है, वो ना तो बिहार के पास है और ना ही पश्चिम बंगाल के पास है. ऐसे में नए एग्रीमेंट करने की ज़रुरत है. मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने भी विधायक की बात पर सहमति जताते हुए कहा कि बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के सचिव से वार्ता कर ठोस निर्णय लिया जाएगा.

झारखंड में जमीन की ऑनलाइन मैपिंग के बाद नाम के हेरफेर का मामला विधानसभा में ज़ोर शोर से उठा. लंबित ध्यानाकर्षण सवाल पर बीजेपी के नीलकंठ सिंह मुंडा ने सदन में कहा कि नाम चढ़ाने के दौरान महतो को मुंडा बना दिया जा रहा है. ऐसे कुछ उदाहरण भी सदन के समक्ष उन्होंने रखे. साथ ही कहा कि इस त्रुटि के लिए कर्मचारी पर कार्रवाई के साथ- साथ लोगों को राहत देने के लिए कैम्प लगाने की जरूरत है ताकि ऐसे मामलों का निष्पादन समय पर हो सके. मंत्री जोबा मांझी ने इसके जवाब में एक माह में एक बार कैम्प लगाने का आश्वासन सदन में दिया.
सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल में अधिक से अधिक सवाल पटल पर लानेने की तत्परता देखने को मिली. यही वजह है कि जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल सदन में आए और सरकार ने उसका जवाब भी दिया. हालांकि सरकार के जवाब के बाद सम्बंधित विभाग कितना काम कर पाता है ये वक्त ही बताएगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज