झारखंड विधानसभा: बजट सत्र की हंगामेदार शुरुआत, नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर बीजेपी विधायकों ने किया हंगामा
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झारखंड विधानसभा: बजट सत्र की हंगामेदार शुरुआत, नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर बीजेपी विधायकों ने किया हंगामा
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र की शुक्रवार को हंगामेदार शुरुआत हुई.

पूर्व मंत्री नीरा यादव ने कहा कि प्रतिष्ठा और मान सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं होता. बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मान्यता नहीं मिली, तो आगे भी सत्र का विरोध करेंगे.

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रांची. झारखंड विधानसभा (Jharkhand Assembly) के बजट सत्र (Budget Session) की हंगामेदार शुरुआत हुई. नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर बीजेपी विधायकों (BJP MLAs) ने सदन के अंदर जमकर हंगामा (Protest) किया. हालांकि इसी हंगामे के बीच संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने 2019-20 का तीसरा अनुपूरक बजट सदन में पेश किया. इससे पहले पंचम विधानसभा के बजट सत्र का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) और संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने उद्घाटन किया. नये विधानसभा भवन में लगे शिलापट्ट का दोनों नेताओं ने अनावरण किया.

वेल में पहुंचकर बीजेपी विधायकों ने किया हंगामा

शुक्रवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही स्पीकर रविन्द्र नाथ महतो के संबोधन से शुरू हुई, बीजेपी विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष के नाम की घोषणा की मांग करते हुए वेल में आकर हंगामा करने लगे. इस दौरान बीजेपी विधायकों ने वेल में नीचे बैठकर जमकर नारेबाजी की. स्पीकर की बार-बार अपील के बाबजूद बीजेपी विधायक नहीं माने और नारेबाजी का दौर शोक प्रकाश तक चलता रहा. हंगामे के बीच ही स्पीकर का संबोधन हुआ. इसके बाद संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने सदन में 2019-20 का तृतीय अनुपूरक बजट पेश किया. फिर शोक प्रकाश के बाद सदन की कार्यवाही सोमवार 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. शोक प्रकाश के दौरान दिल्ली में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई.



मुख्यमंत्री ने बीजेपी विधायकों पर कसा तंज 



बीजेपी विधायकों के हंगामे पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि बीजेपी राजनीतिक दिवालियापन की स्थिति में है. मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को लेकर फैसले का अधिकार स्पीकर को है. हालांकि बीजेपी विधायकों ने इस मुद्दे को जानबूझकर लटकाने का आरोप सत्तापक्ष पर लगाया.

पूर्व मंत्री नीरा यादव ने कहा कि प्रतिष्ठा और मान सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं होता. बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मान्यता नहीं मिली, तो आगे भी सत्र का विरोध करेंगे.

रिपोर्ट- भुवन किशोर

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