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दूसरी बार चुनाव लड़ने उतरा था यह IAS, ब्यूरोक्रेट बीवी ने किया मैनेजमेंट, फिर भी BA पास कैंडिडेट से मिली हार

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: December 28, 2019, 7:05 PM IST
दूसरी बार चुनाव लड़ने उतरा था यह IAS, ब्यूरोक्रेट बीवी ने किया मैनेजमेंट, फिर भी BA पास कैंडिडेट से मिली हार
झारखंड के बीते नगर निकाय चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी के चुनाव प्रचार के दौरान रिक्शा चलाते जेबी तुबिद

जेबी तुबिद (JB Tubid) का चुनाव मैनेजमेंट (Election Management) उनकी पत्नी और झारखंड (Jharkhand) की पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा (Rajbala Verma) देख रही थीं. वर्मा भी एक आईएएस (IAS) अधिकारी रह चुकी हैं, इसके बावजूद वह स्थानीय लोगों को समझने में चूक गईं

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  • Last Updated: December 28, 2019, 7:05 PM IST
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दिल्ली. झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजे आ गए हैं. झारखंड चुनाव के नतीजों ने बीजेपी को ही नहीं चौंकाया है बल्कि राज्य के कई मौजूदा आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) और रिटायर्ड अधिकारियों को भी चौंका दिया है. इस चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे एक पूर्व आईएएस अधिकारी ज्योति भ्रमर तुबिद (JB Tubid) लगातार दूसरी बार चुनाव हारे हैं. चाईबासा विधानसभा सीट (Chaibasa Vidhan Sabha Constituency) से झामुमो (JMM) के दीपक बिरुवा (Deepak Birua) ने जेबी तुबिद को 26 हजार 19 मतों से हरा कर तीसरी बार चाईबासा से विधायक बनने का गौरव हासिल किया है. दीपक इस सीट से 2009 से लगातार जीतते आ रहे हैं. दीपक बिरुवा को हैट्रिक बनाने से रोकने के लिए बीजेपी ने 2014 का चुनाव हारने के बाद भी तुबिद को ही मैदान में उतारा था.

तुबिद दंपत्ति आईएएस अधिकारी रह चुके हैं

बता दें कि जेबी तुबिद ने साल 2014 में राज्य के गृह सचिव के पद से वीआरएस लेकर राजनीति में कदम रखा था, लेकिन लगातार दूसरी बार एक पूर्व आईएएस अधिकारी को एक साधारण बीए पास उम्मीदवार ने अपनी रणनीति के बल पर हरा दिया. जानकारों का मानना है कि तुबिद का अफसरशाही रवैया चाईबासा की जनता को रास नहीं आया. यही वजह रही कि झामुमो प्रत्याशी पहले राउंड से आखिरी राउंड तक मतगणना में आगे रहे और एक भी राउंड में तुबिद दीपक को पछाड़ नहीं पाए.

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जेबी तुबिद ने साल 2014 में राज्य के गृह सचिव के पद से वीआरएस लेकर राजनीति में कदम रखा था


झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी चौथी सूची में जेबी तुबिद का टिकट फाइनल किया था. टिकट देने में इतना विलंब होने के कारण कार्यकर्ता ऊहापोह और आशंका में रहे. तुबिद के मुकाबले झामुमो के दीपक बिरुवा अपनी चुनावी बिसात बिछाने में कामयाब रहे. एक स्थानीय पत्रकार का कहना है कि तुबिद की हार का सबसे बड़ा कारण उनका अफसरशाही रवैया और कमजोर चुनाव मैनेजमेंट रहा. तुबिद को 'सर' कहवाना अच्छा लगता है, मगर जनता को दीपक का हाथ जोड़ कर वोट मांगना पसंद आया.

2014 में तुबिद राजनीति में आए थे

पत्रकार आगे कहते हैं, 'अगर चुनाव प्रबंधन की बात करें तो जेबी तुबिद का चुनाव मैनेजमेंट उनकी पत्नी और राज्य की पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा देख रही थीं. इसके बावजूद वह स्थानीय लोगों को समझने में चूक गईं. तुबिद ने आदिवासी ग्रामीण वोटरों को साधने के लिए कई तरह के प्रयास किए, फिर भी वह कामयाबी हासिल नहीं कर पाए. झामुमो ने इस चुनाव में तुबिद के बेटे के वर्मा टाइटल को भी खूब भुनाया. आदिवासियों को यह समझाने में झामुमो कामयाब रही कि जो अपने बेटे को आदिवासी समाज से अलग पहचान दे रहा है वो आदिवासियों का कैसे हो सकता है. तुबिद की हारने की प्रमुख वजहों में से यह भी एक वजह थी.
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जेबी तुबिद का चुनाव मैनेजमेंट उनकी पत्नी और राज्य की पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा देख रही थीं.


हालांकि तुबिद साल 2014 का चुनाव हारने के बाद लगातार क्षेत्र में रहे और क्षेत्र की जनता से जुड़े भी रहे. इस बार बीजेपी की चौथी लिस्ट में उनका नाम आया, तीन लिस्ट में नाम नहीं आने पर स्थानीय लोग कयास लगाने लगे. बहरहाल लगातार 5 साल क्षेत्र में रहने का तुबिद को पार्टी की तरफ से तो इनाम मिला, लेकिन चुनावी जीत का इनाम वह पार्टी को नहीं दे पाए. साल 2014 के चुनाव में भी वह झामुमो को दीपक बिरुआ से तुबिद करीब 34 हजार वोटों से हारे थे.

जेएमएम के बीए पास कैंडिडेट ने दो बार हराया

बता दें कि जेबी तुबिद 1983 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी हैं. राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए 2014 में उन्होंने सरकारी सेवा से वॉलंटरी रिटायरमेंट ले लिया था. वॉलंटरी रिटायरमेंट लेने के बाद वह बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी ने तुबिद को 2014 का विधानसभा चुनाव में उनके अपने गृहक्षेत्र चाईबासा से भी उम्मीदवार बनाया था. तुबिद को 2014 में चुनाव में मिली हार के बावजूद बीजेपी ने प्रदेश प्रवक्ता पद से नवाजा था. साल 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में तुबिद ने बीजेपी का संकल्प पत्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी.

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बीजेपी ने तुबिद को 2014 का विधानसभा चुनाव में उनके अपने गृहक्षेत्र चाईबासा से भी उम्मीदवार बनाया था


जेबी तुबिद भले ही एक आईएस अधिकारी रहे हैं, लेकिन उनका पारिवारिक इतिहास काफी राजनीतिक रहा है. तुबिद के पिता श्याम चरण तुबिद मशहूर स्वतंत्रता सेनानी थे. साथ ही वे विनोबा भावे के सहयोगी भी रहे थे. तुबिद के पिता संयुक्त बिहार के पहले आदिवासी मंत्री रह चुके हैं. तुबिद के पिता 1961 में बिहार के वन और पंचायती राज मंत्री बने थे. श्याम चरण तुबिद पहले आदिवासी नेता थे जिन्हें बिहार के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. वे 1969 से 1973 बिहार लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष भी रहे. 2018 में 98 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था. तुबिद की पत्नी राजबाला वर्मा भी बिहार और झारखंड की चर्चित आईएएस रही हैं.

तुबिद राजनीतिक परिवार से आते हैं

तुबिद की पत्नी राजवाला वर्मा एक ज़माने में लालू यादव के साथ उनकी सत्ता में काफी करीबी मानी जाती थीं. बिहार में 1995 के विधानसभा चुनाव में भी वर्मा की गया की जिलाधिकारी थीं, लेकिन उनके असहयोग से तंग आकर चुनाव आयोग ने भविष्य में चुनाव कार्यों के लिए उन्हें अयोग्य करार दे दिया था. बाद में राजबाला वर्मा झारखंड की मुख्य सचिव बनीं और कार्यकाल के अंतिम दिनों में उनको चारा घोटाला मामले में काफी किरकिरी झेलनी पड़ी थी.

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First published: December 28, 2019, 6:39 PM IST
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