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झारखंड में डायन हत्या पर केन्द्र ने मांगी रिपोर्ट, राज्य सरकार से पूछे ये सवाल

झारखंड में डायन हत्या पर केन्द्र ने मांगी रिपोर्ट, राज्य सरकार से पूछे ये सवाल

आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में हर साल डायन बिसाही के नाम पर 50 लोगों की जान जाती है. (सांकेतिक तस्वीर)

आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में हर साल डायन बिसाही के नाम पर 50 लोगों की जान जाती है. (सांकेतिक तस्वीर)

Jharkhand News: राज्य सरकार से पूछा गया है कि क्या राज्य के ग्रामीण इलाकों में डायन बिसाही को लेकर लगातार हत्याएं हुई हैं. गृह मंत्रालय ने बीते तीन साल में डायन हत्या के कितने मामले हुए, इसकी जानकारी मांगी है.

रांंची. झारखंड में डायन हत्याओं पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है. केंद्र सरकार ने राज्यसभा में उठाए गए एक सवाल के जवाब में राज्य सरकार को कार्रवाई रिपोर्ट के लिए पत्र लिखा है. इसमें राज्य सरकार से पूछा गया है कि क्या राज्य के ग्रामीण इलाकों में डायन बिसाही को लेकर लगातार हत्याएं हुई हैं. गृह मंत्रालय ने बीते तीन साल में डायन हत्या के कितने मामले हुए, इसकी जानकारी मांगी है. राज्य सरकार से ये भी पूछा गया है कि डायन बिसाही मामले में अगर कोई पीड़ित हो तो उसे क्या सहायता दी गई है. कितने मामलों में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, इसकी भी डिटेल रिपोर्ट राज्य सरकार से मांगी गई है.

झारखंड में डायन-बिसाही में हत्या के मामले सामने आते रहते हैं. अगर रोजाना के हिसाब से देखें तो सूबे में 2 से ज्यादा मामले डायन-बिसाही का होता है. ये सप्ताह में 10 से ज्यादा हो जाता है. डायन-बिसाही की वजह से साल में 50 से ज्यादा लोगों को जान गंवानी पड़ती है. इनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल होती हैं. इसका मतलब ये हुआ कि महीने में 4 लोगों की जान डायन-बिसाही की वजह से जाती है.

2019 में सबसे ज्यादा मामले सामने आए
पिछले पांच साल (2015-20) की डायन-बिसाही से जुड़े आंकड़ों की बात करें तो राज्य में 4 हजार 556 मामले दर्ज किए गए. इसमें हत्या से संबंधित 272 मामले दर्ज हैं. जिसमें 215 महिलाओं की हत्या कर दी गई. गृह विभाग की ओर से ये जानकारी दी गई है. डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम के तहत वर्ष 2015 में 818 मामले दर्ज किए गए. वहीं वर्ष 2016 में 688 मामले, 2017 में 668, वर्ष 2018 में 567, 2019 में 978 और 2020 में 837 मामले दर्ज किए गए.

कुप्रथा के खिलाफ किया जा रहा प्रचार-प्रसार

राज्य सरकार की ओर से ऐसी घटनाओं पर अंकुश के लिए लगातार जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 लागू होने के बाद राज्यभर में डायन कुप्रथा के खिलाफ प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. जमीनी स्तर पर इसके उन्मूलन के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है. राज्य सरकार द्वारा इस सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ सभी जिलों के साप्ताहिक हाट-बाजार में भी अभियान चलाया जाता है. माइक और ऑडियो-वीडियो विजुअल के जरिए प्रचार-प्रसार किया जाता है.

Tags: Central govt, Jharkhand news

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