केंद्र सरकार के फैसले से झारखंड के 1 लाख टेट पास अभ्यर्थियों को जगी उम्मीदें

झारखंड में शिक्षकों के 39,408 पद खाली हैं.

झारखंड में शिक्षकों के 39,408 पद खाली हैं.

झारखंड में नई नियुक्ति नियमावली के अनुसार शिक्षकों (Teachers) की नियुक्ति होनी है. राज्य में फिलहाल 39,408 शिक्षकों के पद रिक्त हैं.

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रांची. सरकारी टीचर बनने की ख्वाहिश रखने वाले उम्मीदवारों के लिए शिक्षा मंत्रालय ने बड़ी खुशखबरी दी है. भारत सरकार का यह निर्णय सभी सीटीईटी (CTET), बिहार टीईटी (Bihar TET), यूपी टीईटी (UP TET), महाराष्ट्र टीईटी (Maharashtra TET), राजस्थान टीईटी (Rajasthan TET) समेत अन्य सभी राज्यों के शिक्षक पात्रता परीक्षाओं पर लागू होगा.

केंद्र सरकार के निर्णय से साफ हो गया है कि 2011 से अब तक सभी सफल अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र वैध हो गए हैं. इस फैसले के बाद बेरोजगार अभ्यर्थियों के अध्यापकों के भी हित में है. यदि उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के प्रमोशन में टीईटी लागू होता है तो पूर्व में सफल शिक्षकों को दोबारा से परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी. उम्र के ऐसे पड़ाव पर परीक्षा होती थी जिसमें सफल हो पाना कठिन होता था.

झारखंड में रिक्त हैं 39,408 शिक्षकों के पद

झारखंड में नई नियुक्ति नियमावली के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति होनी है. राज्य में फिलहाल 39,408 शिक्षकों के पद रिक्त हैं. पिछली सरकार में स्कूलों के विलय होने के बाद करीब 4500 शिक्षकों के पद खत्म हो गए हैं. हेमंत सरकार ने 2021 को नियुक्ति का वर्ष घोषित किया है और शिक्षक नियुक्ति की तैयारी भी चल रही है. नई नियुक्ति नियमावली से होने वाली शिक्षक नियुक्ति  प्रक्रिया में प्राइमरी स्कूल में 17,835, मिडिल स्कूल में 4893, हाई स्कूल में 13,616 और प्लस टू स्कूल में 3064 शिक्षकों की नियुक्ति हो सकेगी.
48 हजार अभ्यर्थियों की वैधता हो चुकी है खत्म

2013 में शिक्षक पात्रता परीक्षा पास किए 48000 अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट की मान्यता पिछले साल 2020 में ही खत्म हो चुकी है. 2013 में जब टेट का आयोजन हुआ था उस समय पांच साल की वैधता रखी गई थी. मई 2018 में अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट की वैधता खत्म हुई तो इसमें दो साल की मान्यता बढ़ाई गई. 2020 में शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने दो साल और मान्यता बढ़ाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन कोरोना  महामारी की वजह से उसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका. इस आधार पर 2016 टेट पास अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट की मान्यता पांच साल से सात साल कर दी गई.

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