राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती खिलाड़ी बहनों को नौकरी का वादा कर भूल गए CM हेमंत, हड़िया बेच कर रहीं गुजारा

कुश्ती खिलाड़ी बहनों के साथ सीएम हेमंत सोरेन (फाइल फोटो)

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने घर जाकर दोनों बहनों को सीधी नियुक्ति का भरोसा दिया था. लेकिन आज तक यह वादा पूरा नहीं हुआ है. राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिताओं में दोनों बहनों ने झारखंड का बढ़ाया है मान.

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रांची. स्थानीय हितों और मुद्दों को लेकर हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Government) हमेशा से गंभीर रहने का दावा करती रही है. लेकिन इन दावों की जमीन कितनी मजबूत है, यह आदिवासी बेटियों के दर्द से ही समझा जा सकता है. रांची के किशोरगंज में घर पर कुश्ती (Wrestling) के दांव और प्रैक्टिस में जुटीं आदिवासी बेटियां राखी और मधु किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. कुश्ती में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद मीडिया में इनकी नौकरी का दर्द हमेशा सुर्खियों में रहता है. दोनों बहनें जब भी कुश्ती के अखाड़े में उतरीं हमेशा ही विरोधियों को चारों खाने चित किया है. लेकिन 2012 से कुश्ती लड़ रही दोनों बहनें सिस्टम के दांव-पेंच और मुख्यमंत्री के वादों की पहेली को अब तक सुलझाने में असफल रही हैं.

राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल और खिताब जीत चुकी राखी और मधु बताती हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दो बार उनके घर पर आ चुके हैं. पहली बार 2016 में मुख्यमंत्री बनने से पहले और जनवरी 2020 में सीएम की कुर्सी संभालने के बाद उनके घर पहुंचे थे. घर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने दोनों बहनों को सीधी नियुक्ति का भरोसा दिया था. लेकिन आज तक उस भरोसे की जमीन कहीं नजर नहीं आई.

दोनों बहनों ने नेशनल लेवल पर किया कमाल


राष्ट्रीय स्तर पर राखी और मधु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2012 से अब तक कई मेडल जीते हैं. राखी ने 2014 राष्ट्रीय स्तर पर एक सिल्वर मेडल जीतने के साथ-साथ केरल में आयोजित 35वें नेशनल गेम में देशभर में आठवां स्थान प्राप्त किया. वहीं 2016 और 2018 सीनियर नेशनल में टॉप फाइव में स्थान बनाया. अब सीनियर नेशनल कुश्ती में स्थान बनाने के बाद 28 जनवरी को आगरा के लिए रवाना होंगी. ठीक ऐसी ही सफलता राष्ट्रीय स्तर पर राखी की छोटी बहन मधु ने भी अर्जित की है.

मां का गुस्सा फूटा


दोनों बहनों की मानें तो उनसे कमतर प्रदर्शन करने वालों को सीधी नियुक्ति दी गई, जबकि उन्हें अनदेखा कर दिया गया. दोनों बेटियों की कड़ी मेहनत के पीछे एक मां का संघर्ष भी है. लिहाजा सीएम के वादे पर एक मां का गुस्सा फूट पड़ता है. मां रूपम तिर्की की मानें तो गरीबी की वजह से वह अपनी दोनों बेटियों को कुश्ती के लिए जरूरी दूध और दूसरे पौष्टिक आहार नहीं दे पाती हैं. उन्होंने कहा कि आदिवासी सीएम को आदिवासी बेटियों का संघर्ष और अपना वादा नजर नहीं आ रहा. गरीबी और मुफलिसी के बीच पूरे परिवार का गुजारा मुर्गी और बकरी पालन के साथ-साथ हड़िया बेचकर हो रहा है.

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