झारखंड के बहुचर्चित कंबल घोटाले की ACB करेगी जांच, CM हेमंत ने दिये आदेश
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झारखंड के बहुचर्चित कंबल घोटाले की ACB करेगी जांच, CM हेमंत ने दिये आदेश
एसीबी जल्द ही केस दर्ज कर इस मामले में जांच शुरू करने वाली है.

झारखंड में मई 2016 से दिसंबर 2017 तक कंबल खरीदने के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितता (Blanket Scam) हुई. इसका खुलासा एजी की रिपोर्ट (AG Report) से हुआ, जिसमें हरियाणा (Haryana) से कंबल के धागे मंगवाने में फर्जीवाड़े की बात सामने आई.

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रांची. झारखंड के बहुचर्चित झारक्राफ्ट कंबल घोटाले (Blanket Scam) की जांच अब एसीबी (ACB) करेगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने इसके लिए एसीबी जांच की स्वीकृति दे दी है. सूबे में कंबल खरीद के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था. अब एसीबी जांच के आदेश के बाद इस मामले में आरोपी झारक्राफ्ट के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी रहे श्रीमती रेणु गोपीनाथ पणिकर, उप महाप्रबंधक मोहम्मद नीसम अख्तर और मुख्य वित्त पदाधिकारी अशोक ठाकुर की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

क्या है झारक्राफ्ट का कंबल खरीद घोटाला

राज्य सरकार ने गरीबों को बांटने और विभिन्न सरकारी संस्थाओं में उपयोग के लिए झारक्राफ्ट को राज्य के बुनकरों से कंबल निर्माण कराने का ऑर्डर दिया था. इसके लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. मगर झारखंड के बुनकरों से बनवाने की जगह हरियाणा से कंबल की खरीद दिखाकर राशि की बंदरबांट कर ली गई. प्रारंभिक जांच में 18 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की बात सामने आई.



मामला सामने आने के बाद झारक्राफ्ट की तत्कालीन सीईओ रेणु गोपीनाथ पणिक्कर को हटाया दिया गया था. छानबीन में ये भी पता चला कि मई 2016 से दिसंबर 2017 तक बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई. इसका खुलासा तब हुआ जब महालेखाकार की रिपोर्ट सामने आई जिसमें हरियाणा से कंबल के धागे मंगवाने के नाम पर फर्जी दस्तावेज दिखाकर वित्तीय अनियमितता दर्शाया गया.
एजी की रिपोर्ट में हुआ घोटाले का खुलासा 

झारक्राफ्ट ने हस्तकरघा खरीदने के नाम पर करीब 2.02 करोड़ खर्च करने का दावा किया था, पर किसे दिया इसका कोई अता-पता नहीं था. 9 लाख 82 हजार 717 कंबल बनवाने का काम दिया गया था, लेकिन क्रास वेरिफिकेशन में पाया गया कि झारक्राफ्ट ने 9,82,717 में से 8,13,091 कंबलों की बुनाई एसएचजी और बुनकर सहयोग समितियों द्वारा नहीं करायी.  8.13 लाख कंबलों की बुनाई दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किये गये. झारक्राफ्ट के कुछ लोगों ने सहयोग समितियों के साथ मिल कर साजिश रची और ऊनी धागे की ढुलाई, कंबलों की बुनाई- धुलाई दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किये. कंबल बनाने के लिए 18.81 लाख किलो ऊनी धागा पानीपत से मंगाने के झारक्राफ्ट के दावे को एजी ने फर्जी पाया.

झारक्राफ्ट के मुताबिक 18.81 लाख किलो ऊनी धागे की ढुलाई पानीपत से कराने के लिए 144 ट्रक को 320 ट्रिप लगाने पड़े. लेकिन एजी ने इसका डीटेल और तारीख का मिलान नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के आंकड़ों से कराया तो मात्र दो ट्रिप की बात सही पाया, जबकि 318 ट्रिप फर्जी पाया.

महालेखाकार की टिप्पणी के बाद झारक्राफ्ट कंबल खरीद घोटाला की आवाज़ समय-समय पर उठता रहा और जांच समितियां भी बनती रही. मगर जांच पूरी कर दोषियों पर कार्रवाई अब तक नहीं हो पायी. अब इस घोटाले की जांच का जिम्मा एसीबी को दिया गया है. एसीबी जल्द इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू करेगी.
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