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हार्वर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस में बोले CM हेमंत सोरेन- आदिवासियों को सदियों से दबाया गया, आज भी यही मानसिकता

हार्वर्ड कान्फ्रेंस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदिवासी को लेकर दिये गये बयान पर राज्य की सियासत गर्म हो गई है.

हार्वर्ड कान्फ्रेंस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदिवासी को लेकर दिये गये बयान पर राज्य की सियासत गर्म हो गई है.

Harvard-India Conference: में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) ने कहा कि आदिवासियों की स्थिति क्या है, यह महत्वपूर्ण सवाल है. मैं एक आदिवासी हूं और मुख्यमंत्री के पद पर पहुंचा हूं, लेकिन यह आसान नहीं था.

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रांची. झारखण्ड भारत का ही हिस्सा है. लंबे संघर्ष के बाद साल 2000 में यह अलग राज्य बना. यह आदिवासी बहुल राज्य है. अलग राज्य की परिकल्पना इसलिए की गई, क्योंकि यहां के लोगों का विकास सुनिश्चित किया जा सके. राज्य गठन को 20 वर्ष हो चुका है. इस बीच कई सरकारें आईं, लेकिन झारखण्ड को अपने सफर में जहां पहुंचना था, वहां नहीं पहुंच सका. अगर झारखण्ड और यहां के निवासियों का विकास होता है, तो भारत का भी विकास होगा. ये बातें मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने हार्वर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस में कही.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासियों की स्थिति क्या है, यह महत्वपूर्ण सवाल है. मैं एक आदिवासी हूं और मुख्यमंत्री के पद पर पहुंचा हूं, लेकिन यह आसान नहीं था. संविधान में प्राप्त संरक्षण के बावजूद आदिवासियों को जगह नहीं दी गई. सदियों ने इन्हें दबाया गया. आज भी यही मानसिकता है. ऐसे समुदाय को बुरी नजरों से देखा जाता है. यह चिंता की बात है. यही वजह है कि सरकार आदिवासी बच्चों को विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई का अवसर प्रदान करा रही है. भारत सरकार भी इस तरह की योजना संचालित करती है. लेकिन आदिवासी बच्चों को योजना का लाभ नहीं मिल पाता है.

'आदिवासियों के हितों की रक्षा प्राथमिकता'



मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासियों के लिए पॉलिसी में बात तो की जाती है. लेकिन कार्य इसके विपरीत है. देश में ट्राइबल काउंसिल, आदिवासी मंत्रालय है. संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची में अधिकार प्राप्त है, लेकिन इसका लाभ आदिवासियों को नहीं मिल रहा है. यही वजह है कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि आगामी जनगणना में आदिवासी समूह के लिए अलग कॉलम होना चाहिए. ताकि वे अपनी परंपरा और संस्कृति को संरक्षित कर आगे बढ़ सकें.
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड में कई तरह के आदिवासी हैं. झारखण्ड में उनकी अस्मिता की रक्षा के लिए कार्य किया जा रहा है. वर्तमान सरकार ने ट्राइबल यूनिवर्सिटी बनाने का निर्णय लिया है. जिससे शिक्षा के क्षेत्र में इनका सतत विकास हो सके. पूरे देश में आदिवासियों की पहचान कायम रहे. यह प्रयास सरकार का रहेगा. सरकार इन्हीं को केंद्र में रखकर कार्य कर रही है.
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