CM सोरेन ने PM मोदी को लिखा पत्र, कहा- GST में होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं कर रही केंद्र सरकार
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CM सोरेन ने PM मोदी को लिखा पत्र, कहा- GST में होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं कर रही केंद्र सरकार
राज्यों को भी आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा संवैधानिक दायित्वों की पूर्ति आवश्यक है. (फाइल फोटो)

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने कहा कि तीन वर्ष पहले किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कर वसूलने के हमारे अधिकार लेने के बाद केन्द्र सरकार राज्यों के साथ ऐसा बर्ताव करेगी.

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रांची. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) को पत्र लिख कर कहा कि केन्द्र सरकार अपने वादे के अनुरूप राज्य को जीएसटी (GST) में होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं कर रही है. तीन पृष्ठ के इस पत्र में मुख्यमंत्री ने इसे विश्वास तोड़ने वाली बात बताया और कहा कि केन्द्र सरकार (Central Goverment)ने तीन वर्ष पूर्व इस कर व्यवस्था को लागू करते समय राज्यों को जीएसटी से होने वाले नुकसान की पांच वर्षों तक भरपाई का आश्वासन दिया था जिसे तीन वर्ष बाद भी नहीं निभाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि तीन वर्ष पहले किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कर वसूलने के हमारे अधिकार लेने के बाद केन्द्र सरकार राज्यों के साथ ऐसा बर्ताव करेगी.

सीएम सोरेन ने जीएसटी काउंसिल की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने करोड़ों रुपये कर्ज लेने का विकल्प बताया है. उन्होंने कहा कि तीन साल पहले  पहले किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि ऐसी भी स्थिति आएगी. यह कार्रवाई संघीय ढांचे के विरुद्ध है और इससे राज्यों को जीएसटी में भारी घाटा उठाना पड़ेगा. इसका असर केंद्र और राज्य के बीच में चले आ रहे संबंधों पर भी पड़ेगा.

क्या लिखा है लेटर में
लेटर में सीएम सोरेन ने कहा है कि 1 जुलाई 2017 की मध्यरात्रि को जीएसटी की घोषणा के वक्त मैं आपका भाषण बहुत ध्यान से सुन रहा था, क्योंकि गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए आपने इसका पुरजोर विरोध किया था. उस रात्रि आपने अपने संबोधन में कहा था कि जीएसटी सहकारी संघीय ढांचे का एक बेहतरीन उदाहरण होगा, जो राष्ट्र की उन्नति में सहायक होगा. मैं आपकी भावना की प्रशंसा करता हूं, लेकिन क्या इस प्रकार के व्यवहार से यह विश्वास पैदा होगा? राज्यों को भी आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा संवैधानिक दायित्वों की पूर्ति आवश्यक है.
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