झारखंड विधानसभा चुनाव में JVM-RJD से दूर रहना चाहती है कांग्रेस, ये है वजह

झारखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस (Congress) बाबूलाल मरांडी की जेवीएम (JVM) और लालू प्रसाद यादव की आरजेडी (RJD) से दूसरी बनाना चाहती है. जबकि उसे हेमंत सोरेन का साथ पसंद आ रहा है.

Ranjeeta Jha | News18Hindi
Updated: September 10, 2019, 4:49 PM IST
झारखंड विधानसभा चुनाव में JVM-RJD से दूर रहना चाहती है कांग्रेस, ये है वजह
झारखंड विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन का साथ चाहती है कांग्रेस.
Ranjeeta Jha
Ranjeeta Jha | News18Hindi
Updated: September 10, 2019, 4:49 PM IST
रांची. झारखंड विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Elections) में कांग्रेस (Congress) बाबूलाल मरांडी की जेवीएम (JVM) और लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की आरजेडी से समझौता करना नहीं चाहती है. कांग्रेस को लगता है कि अगर वह जेएमएम, जेवीएम और आरजेडी के साथ चुनाव लड़ेगी तो उसके हिस्से में 81 विधानसभा सीटों में से महज 25 सीटें ही आएंगी. ऐसे में कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि झारखंड विधानसभा चुनाव में जेएमएम और कांग्रेस के बीच समझौता होना चाहिए, ताकि वह लगभग 35- 40 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ सके. कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि एक तरफ 40 सीट पर लड़ने से कांग्रेस पार्टी के संगठन को फ़ायदा होगा और दूसरी तरफ आरजेडी और जेवीएम का वोट कांग्रेस के उम्मीदवारों को नहीं पड़ता है. इसी वजह से उसे कोई नुकसान होने वाला नहीं है.

लोकसभा चुनाव में ऐसा हुआ

लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आरजेडी और जेवीएम ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, जिसके नतीजे कांग्रेस के लिए ज़्यादा फायदेमंद साबित नहीं हुए. कांग्रेस महज एक लोकसभा सीट ही जीत पाई. दरअसल, कांग्रेस की समस्या ये है कि अगर वो हेमंत सोरेन और बाबूलाल मरांडी दोनों को समझौते में रखती है तो दोनों ही अपने आप को चुनाव से पहले मुख्यमंत्री घोषित करना चाहते हैं. जबकि कांग्रेस के पास पूरे झारखंड में कोई ऐसा चेहरा नहीं है, जिसे वो मुख्यमंत्री घोषित कर सके.

कांग्रेस की ये है चाहत

ऐसे में कांग्रेस के सूत्र यह भी बता रहे हैं कि अगर सिर्फ हेमंत सोरेन और कांग्रेस का समझौता होता है तो सोरेन ख़ुद को मुख्यमंत्री के रूप में देख ही रहे हैं, जो कि कांग्रेस को कम से कम सीटें देकर समेटना चाहेंगे. हालांकि कांग्रेस देर से ही सही हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने पर राज़ी हो सकती है, क्योंकि जब लोकसभा चुनाव में समझौता हुआ था तो ज़्यादा सीटें कांग्रेस ने ली थी. जबकि उस वक़्त यही शर्त थी कि हेमंत सोरेन को विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाएगा.

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First published: September 10, 2019, 4:42 PM IST
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