झारखंड: प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने की चर्चा के बीच कांग्रेस लोहरदगा में राजनीतिक विरासत बचाने को बेचैन

झारखंड में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के बदले जाने और सोरेन मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चा जोरों पर है.

झारखंड के राजनीतिक गलियारों में तमाम चर्चाओं के बीच लड़ाई लोहरदगा में राजनीतिक विरासत को बचाने और बढ़ाने की है. लोहरदगा के सियासी मैदान पर कब्जा बरकरार रखना झारखंड कांग्रेस का एक मात्र लक्ष्य है.

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रांची. झारखंड के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों कांग्रेस की चर्चा हो रही है. चर्चा प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव को बदले जाने की, हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की, प्रदीप बालमुचू और सुखदेव भगत के कांग्रेस में वापसी को लेकर हो रही है. असल, लड़ाई लोहरदगा में राजनीतिक विरासत को बचाने और बढ़ाने को लेकर है. दरअसल कांग्रेस के अंदर खाने यही खिचड़ी पक रही है. झारखंड कांग्रेस के अंदर मची इस हलचल में लोहरदगा के सियासी मैदान पर कब्जा बरकरार रखना एक मात्र लक्ष्य है.

रांची से दिल्ली तक मची इस राजनीति आपाधापी की असल कहानी कुछ ऐसी है. प्रदीप बालमुचू के कांग्रेस में वापसी पर हां और सुखदेव भगत की वापसी पर ना बा ना, ये बताने के लिये काफी है कि दिल्ली परिक्रमा का सच क्या है. अब तो कांग्रेस के विधायक इरफान अंसारी भी सुखदेव भगत को लेकर अभी व्यक्तिगत लड़ाई छोड़ वापसी का स्वागत करने की नसीहत प्रदेश अध्यक्ष को देने लगे है. राष्ट्रीय दल होने के नाते कांग्रेस में किसकी वापसी होगी और किसकी नहीं, ये सब कुछ दिल्ली दरबार से ही तय होता है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे डॉ अजय कुमार का जाना और फिर लौट आना, इस परंपरा की ओर इशारा करता है. डॉ अजय कुमार की तरह ही प्रदीप बालमुचू और सुखदेव भगत भी कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे है. इनकी वापसी का आवेदन भी कई माह से दिल्ली दरबार में लंबित पड़ा है.

कांग्रेस के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष का राजनीतिक खूंटा भी बेहद मजबूत है. उनके काम-काज और संगठन के विस्तार को लेकर एक खेमा जबरदस्त तरीके से लॉबिंग में लगा है, पर इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता की रामेश्वर उरांव भविष्य में अपने राजनीतिक विरासत को बचाने और बढ़ाने के लिये बेचैन है. सुखदेव भगत के कांग्रेस में वापसी से उनकी इस सोच को झटका लगना तय है. शायद यही वजह है कि रामेश्वर उरांव और राज्यसभा सांसद धीरज साहू की जोड़ी दिल्ली में डेरा जमाए हुये है. कांग्रेस में जहां तक बदलाव की बात है तो कांग्रेस कुछ और राज्यों में भी सांगठनिक बदलाव करने जा रही है. उस बदलाव के बाद ही झारखंड में कोई बदलाव संभव होता हुआ दिखता है, जबकि कैबिनेट में फेरबदल को लेकर अभी ना तो कांग्रेस में आम सहमति बन पाई है और ना ही 12वें मंत्री को लेकर जेएमएम और कांग्रेस में फिलहाल कोई सहमति की सूचना है.

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