बिना अध्यक्ष फैसला नहीं ले पा रही कांग्रेस, झारखंड में टूटने की कगार पर गठबंधन

इस समय कांग्रेस के साथ बड़ी समस्या ये है कि झारखंड मामले पर फैसला कैसे ले? गठबंधन जैसा महत्वपूर्ण फैसला क्या, महासचिव या प्रभारी ले सकता है, कांग्रेस इसी पशोपेश में दिखाई दे रही है.

Anurag Dhanda
Updated: July 12, 2019, 11:59 PM IST
बिना अध्यक्ष फैसला नहीं ले पा रही कांग्रेस, झारखंड में टूटने की कगार पर गठबंधन
झारखंड में टूट सकता है विपक्षी गठबंधन
Anurag Dhanda
Updated: July 12, 2019, 11:59 PM IST
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के अध्यक्ष हेमंत सोरेन के 41 सीटों पर लड़ने के बयान के बाद राज्य में विपक्षी गठबंधन की संभावनाएं खत्म होती नज़र आ रही हैं. हालांकि झारखंड में अकेले लड़ना भी कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है. लेकिन इस समय कांग्रेस के साथ इससे बड़ी समस्या ये है कि इस मामले पर फैसला कैसे ले? गठबंधन जैसा महत्वपूर्ण फैसला क्या कार्यकारी अध्यक्ष, महासचिव या प्रभारी ले सकता है, कांग्रेस इसी पशोपेश में दिखाई दे रही है.

हेमंत सोरेन के बयान पर टूट सकता है समझौता


झारखंड में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस और जेएमएम का समझौता टूटने की कगार पर है और अध्यक्ष की गैरमौजूदगी में पार्टी के नेता गठबंधन पर कोई बड़ा फैसला ले नहीं पा रहे हैं. जेएमएम के अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने हाल ही में बयान दिया है कि वो 41 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. सूत्रों के मुताबिक हेमंत सोरेन ने कांग्रेस को इस बारे मे कोई जानकारी भी नहीं दी है. यानि अगर सभी विपक्षी पार्टियां  मिलकर बीजेपी के सामने चुनाव लड़ती हैं और 81 सीटों की विधानसभा में जेएमएम अकेले 41 सीटों पर लड़ने का दावा कर रही है, तो कांग्रेस, जेवीएम, आरजेडी और लेफ्ट के लिए महज 40 सीटें बचती हैं, जो कि इन पार्टियों को किसी भी सूरत में मंजूर नहीं हो सकता.

Jharkhand में टूटने की कगार गठबंधन, दुविधा में कांग्रेस
झारखंड में टूटने की कगार पर गठबंधन, दुविधा में कांग्रेस


समझौते के लिए रास्ता निकालेंगे
कांग्रेस के झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह का कहना है कि 'हमने झारखंड कांग्रेस के नेताओं से रिपोर्ट मांगी है कि किस पार्टी के साथ समझौता करना चाहिए? कई ज़िला अध्यक्षों ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है और इस पर आगे भी चर्चा जारी है. जहां तक हेमंत सोरेन के 41 सीटों पर लड़ने के दावे की बात है तो इस पर मैं टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन समझौता हो इसलिए हम कोई रास्ता निकालने की कोशिश ज़रूर कर रहे हैं'.

2014 में कांग्रेस को केवल 6 सीटें मिली थीं
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2014 के विधानसभा चुनाव मे कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ी और कांग्रेस को महज 6 सीटें मिलीं. ऐसे में बिना गठबंधन के चुनाव लड़ना कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकता है लेकिन इस वक़्त कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या ये है कि पार्टी के पास अध्यक्ष नहीं है. ऐसे में महासचिव या प्रभारी गठबंधन जैसा बड़ा फैसला लें भी तो कैसे?

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