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झारखंड: JMM इस मुद्दे पर चुप्पी साधकर बढ़ा रही कांग्रेस की बेचैनी

झारखंड: लंबा फंसा है निगरानी समिति गठन पर पेंच, कांग्रेस के भीतर बढ़ रही कार्यकर्ताओं की नाराजगी (सांकेतिक फोटो)

झारखंड में समय के साथ 20 सूत्री और निगरानी समिति के गठन मसला गहराता जा रहा है. हेमंत सोरेन सरकार में शामिल कांग्रेस के अंदर इस बात को लेकर नाराजगी अपने चरम पर है, जबकि जेएमएम इस मुद्दे पर चुप्पी साधकर कांग्रेस की बेचैनी को बढ़ा रही है.

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रांची. झारखंड (jharkhand) में समय के साथ 20 सूत्री और निगरानी समिति के गठन मसला गहराता जा रहा है. हेमंत सोरेन सरकार (hemant soren government) में शामिल कांग्रेस (congress) के अंदर इस बात को लेकर नाराजगी अपने चरम पर है, जबकि जेएमएम इस मुद्दे पर चुप्पी साधकर कांग्रेस की बेचैनी को बढ़ा रही है. राज्य सरकार गठन के डेढ़ साल बाद आलम ये है कि समिति गठन के सवाल पर भी सत्ताधरी दल के पास कोरोना संक्रमण का बहाना छोड़ कोई दूसरा रास्ता नहीं सूझ रहा.

सत्ता परिवर्तन के बाद हर बार झारखंड जैसे प्रदेश में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की नजर 20 सूत्री से लेकर निगरानी समिति के गठन पर टिकी होती है. चुनावी समर में कार्यकर्ताओं के दम पर जीत दर्ज करने वाले विधायक या तो मंत्री बन जाते हैं या विधानसभा समिति के अध्यक्ष. वहीं पार्टी कार्यकर्ताओं की नजर बोर्ड - निगम पर होती है.

कहने को तो विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार पर विराम लगाने की ये कोशिश होती है, लेकिन असल में कार्यकर्ताओं को पद दे कर उनका सम्मान बढ़ाया जाता है. हेमंत सोरेन सरकार अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में इस समिति का गठन भी नहीं कर सकी है. कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर के अनुसार इसको लेकर दिल्ली दरबार भी गंभीर है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लगातार बात हो रही है. अगले कुछ दिनों में समिति का गठन कर लिया जाएगा.

पांच माह पूर्व ही बन गई थी चार सदस्यीय समिति

झारखंड कांग्रेस ने 20 सूत्री और निगरानी समिति का फार्मूला तय करने के लिये करीब 5 माह पूर्व ही चार सदस्यों की समिति बना दी है. इस कमिटी में प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव, विधायक दल के नेता आलमगीर आलम, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और राजेश ठाकुर शामिल हैं. कई बार कमिटी के सदस्य मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष इस मुद्दे पर हजारी लगा चुके हैं, पर हुआ कुछ भी नहीं है. हालांकि अब जेएमएम के प्रवक्ता मनोज पांडेय बताते हैं कि बहुत जल्द इसका निबटारा कर लिया जाएगा.

दरअसल, झारखंड में ना सिर्फ 20 सूत्री का गठन या निगरानी समिति का गठन पर ही पेंच नहीं है, बल्कि बोर्ड - निगम के अध्यक्ष पद की खाली कुर्सी भी सत्ताधरी दल के नेताओं को बेचैन कर रही है. सत्ता में शामिल एक खेमे को ये लगता है कि इसके बंटवारे से आपसी खटास बढ़ेगी, तो दूसरे खेमे को ये विश्वास है कि कार्यकर्ताओं में नाराजगी का ग्राफ गिरेगा.

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