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हेमंत सरकार को गिराने की साजिश या बचाने के लिए साजिश! पढ़ें इनसाइड स्टोरी

रांची पुलिस ने हेमंत सरकार के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. (फाइल फोटो)

रांची पुलिस ने हेमंत सरकार के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. (फाइल फोटो)

Hemant Soren Govt: झारखंड में फिलवक्त जो कुछ चल रहा है उसके कई राजनीतिक मायने हैं. या तो सचमुच में हेमंत सोरेन सरकार को गिराने की साजिश चल रही है या ऐसे किसी साजिश से राज्य सरकार को बचाने के लिए साजिश का सहारा लिया जा रहा है.

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रांची. झारखंड की सियासत में फिलहाल हलचल मची हुई है. बात सूबे की हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Soren Govt) को अपदस्थ करने को लेकर है. मतलब दूसरे शब्दों में कहे तो सरकार गिराने को लेकर है. दरअसल ये बात तब सामने आई जब पुलिस के मुताबिक राजधानी रांची के एक होटल से तीन लोगों को पकड़ने का दावा किया गया. हालांकि इस दावे की हकीकत पकड़े गए लोगों के परिजनों के बयान से भी समझा जा सकता है. एक बात ये भी कि क्या फल बिक्रेता या ठेका मजदूर किसी सरकार को गिराने के लिये कितना सफल साबित हो सकता है. ये तमाम बातें पुलिसिया अनुसंधान का विषय है या यूं कहें कि किसी बड़े राजनीतिक साजिश का हिस्सा भी.

मगर यहां एक सवाल जरूर उठता है कि क्या झारखंड में सत्ता परिवर्तन को लेकर वाकई कोई खेल नहीं चल रहा. क्या वाकई हेमंत सोरेन की सरकार या गठबंधन इतना ज्यादा मजबूत है कि उसे हिला पाना या गिरा पाना इतना आसान नहीं है. झारखंड के राजनीतिक इतिहास को देख कर तो ऐसा कतई नहीं लगता. हाल के वर्षों में देश के दूसरे राज्यों में चुनाव पूर्व हुए सत्ता परिवर्तन से तो इसे बखूबी समझा जा सकता है. झारखंड में सत्ता के उलट फेर की राजनीतिक संभावनाओं को टटोलें, तो कुछ धुंधली सी तस्वीर जरूर समझ में आती है.

सत्ताधरी दल के अंदर खटपट
हेमंत सोरेन सरकार के अंदर कुछ विधायक नाराज जरूर चल रहे हैं. ये नाराजगी जेएमएम और कांग्रेस दोनों के अंदर झलकती है. जेएमएम के कुछ विधायक इस बात को लेकर नाराज है कि सूबे में खुद की सरकार होने के बावजूद उनकी नहीं चल रही. कुछ विधायकों की इच्छा मंत्रिमंडल में जगह मिलने को लेकर भी है, जो पूर्ण नहीं हो सकी. मुख्यमंत्री के भाई बसंत सोरेन के विधायक बनने के बाद से भी जेएमएम के अंदर नाराज विधायकों की खिचड़ी पक रही है. कांग्रेस के अंदर भी कुछ ऐसा ही हाल है. हेमंत सोरेन कैबिनेट में शामिल कांग्रेस कोटे के चार मंत्रियों की बात छोड़ दें, तो पार्टी का एक भी विधायक ऐसा नहीं है जो या तो संगठन से नाराज है या सरकार से नाराज. पहली बार चुनाव जीत कर आने वाले विधायक सबसे कमजोर कड़ी के तौर पर देखे जा रहे हैं.

बीजेपी का दांव और उसके उलट डर 

बीजेपी के लिये दूसरे प्रदेश की तरह झारखंड में फेरबदल इतना आसान नहीं है. हेमंत सोरेन के खिलाफ ऑपरेशन कमल का कमाल यहां तभी संभव है जब कांग्रेस के साथ- साथ जेएमएम में भी उसकी सेंधमारी सफल साबित हो. किसी एक दल में टूट से बीजेपी को बहुत ज्यादा फायदा नहीं हो सकता है. बीजेपी अगर दोनों दल के अंदर सेंधमारी करने में सफल साबित होती है, तो उसे खुद के विधायकों को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती होगी. क्योंकि ऐसा होने पर बीजेपी का साथ देने वाले विधायकों का हिस्सा कैबिनेट में बढ़ जाएगा और शायद बीजेपी के वैसे विधायक जो मंत्री बनने की रेस में शामिल है, वो एक झटके में बाहर हो जाएंगे. यानी राजनीतिक दल के तौर पर बीजेपी को फायदा जरूर हो सकता है, पर उसके विधायकों को नहीं. कहा तो ये भी जा रहा है कि जेएमएम के संपर्क में अभी से ही बीजेपी कुछ विधायक है.

झारखंड में कुछ भी संभव

इतिहास गवाह है कि बिहार से अलग होने के बाद से अबतक झारखंड की राजनीति ने हमेशा ही चौंकाया है. फिर वो बात बाबूलाल मरांडी के पहले मुख्यमंत्री बनने की हो, या उन्हें हटा कर अर्जुन मुंडा के कुर्सी पर विराजमान होने की. निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा के मुख्यमंत्री बनने की हो या बीजेपी और जेएमएम के बीच 14 - 14 महीने की सरकार चलाने को लेकर समझौते की. यहां कुछ भी और कभी भी संभव है. वर्तमान में भी जो कुछ चल रहा है उसके कुछ राजनीतिक मायने हैं. या तो सचमुच में हेमंत सोरेन सरकार को गिराने की साजिश चल रही है या ऐसे किसी भी साजिश से राज्य सरकार को बचाने की कोई नई साजिश.

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