कोरोना अलर्ट : झारखंड में आज संक्रमण के मिले 340 नए मामले, 4 मरीजों की मौत

कई जिलों में कोरोना की टेस्टिंग बेहद कम हो रही, जो चिंता की बात है. (फाइल फोटो)

कई जिलों में कोरोना की टेस्टिंग बेहद कम हो रही, जो चिंता की बात है. (फाइल फोटो)

झारखंड ने कोरोना की पहले लहर को 3T यानी ट्रेसिंग, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट के बल पर काबू किया था, इस बार भी वहीं रणनीति बनाई गई है. पर कई जिलों में कम हो रही ट्रेसिंग और टेस्टिंग के चलते बात बन नहीं रही.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 28, 2021, 12:08 AM IST
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रांची. झारखंड (Jharkhand) में पूरी तरह कमांड में आ चुका कोरोना वायरस (Coronavirus) फिर एकबार अपना मारक रूप दिखाने लगा है. आज राज्य में कोरोना वायरस ने 4 लोगों की जान ले ली. स्वास्थ्य विभाग (Health Department) से मिली जानकारी के अनुसार साहेबगंज में 2, रांची और गुमला में 1-1 कोरोना मरीजों की मौत हो गई. आज हुई 4 मौतों के बाद कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1107 हो गई है.

आज मिले 340 नए संक्रमित केस

झारखंड में कोरोना से जुड़े आंकड़े और डेटा एक महीने में ही बदल गए. 27 फरवरी 2021 और 27 मार्च 2021 के बीच के आंकड़ों की तुलना करें, तो साफ दिखता है कि राज्य में कोरोना किस कदर खतरनाक रूप लेता जा रहा है. 27 फरवरी को राज्य में जहां 24 में से 17 जिलों में एक भी केस नहीं मिला था, वहीं 27 मार्च को 24 में से 20 जिलों में नए संक्रमित मिले. आज कुल 340 नए केस झारखंड में मिले हैं. महज 4 जिले गढ़वा, गिरिडीह, पलामू और सरायकेला खरसावां ही ऐसे रहे, जहां एक भी केस नहीं मिला. उसकी वजह सम्भवतः यह रही कि इस जिलों में जांच 200 से भी कम लोगों का हुआ.

एक महीने में एक्टिव केस की संख्या तिगुना से ज्यादा
एक और आंकड़ा जो चिंता पैदा करता है, वह है राज्य में एक्टिव केस की बढ़ती संख्या. 27 फरवरी को राज्य में महज 492 कोरोना एक्टिव मरीज थे, जो अब तीगुना से भी ज्यादा 1636 हो गए हैं.

3T पर जोर

झारखंड ने कोरोना की पहले लहर को जिस 3T यानी ट्रेसिंग, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट के बल पर काबू किया था, इस बार भी वहीं रणनीति बनाई गई है. पर कई जिलों में कम हो रही ट्रेसिंग और टेस्टिंग के चलते संदिग्धों की पहचान सही से नहीं हो रही. आज जहां राजभर में 9036 लोगों के सैम्पल टेस्ट हुए, तो कई जिले ऐसे रहे जहां 100 से भी कम लोगों की जांच हुई. खूंटी में 23, लोहरदगा में 65, दुमका में 93, जामताड़ा में 33 और रामगढ़ में 86 लोगों की जांच यही बताती है कि इन जिलों में जांच के प्रति गंभीरता नहीं दिख रही.
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