Ranchi: श्मशानाें में कम पड़ गई जगह, घाघरा घाट पर खुले में जलाने पड़ रहे कोराेना संक्रमितों के शव

रांची में श्मशान घाटों पर जगह कम पड़ गई है, जिससे खुले में जलाने पड़ रहे हैं शव.

रांची में श्मशान घाटों पर जगह कम पड़ गई है, जिससे खुले में जलाने पड़ रहे हैं शव.

रांची के हरमू मुक्तिधाम जगह की कमी के कारण सोमवार को लगातार दूसरे दिन नामकुम घाघरा घाट पर 22 गुना संक्रमित के शवों का अंतिम संस्कार किया गया. सुबह 6:00 बजे से शुरू होकर यह देर रात तक चलता रहा.

  • Last Updated: April 14, 2021, 6:12 PM IST
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रांची. राजधानी रांची के हरमू मुक्तिधाम में जगह कम पड़ जाने पर सोमवार को लगातार दूसरे दिन नामकुम घाघरा घाट पर 22 गुना संक्रमित के शवों का अंतिम संस्कार किया गया. सुबह 6 बजे से शुरू होकर यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा. इधर शवों के अंतिम संस्कार के बाद भी 15 से अधिक शवों के आने की सूचना नगर निगम को मिली थी, इसीलिए देर रात तक यहां भी चिता सजाने का काम चलता रहा.

अंत्येष्टि करने में कोई परेशानी ना हो, इसके लिए नगर निगम ने यहां 3 टीमें तैनात की हैं. यह टीम शिफ्ट वाइज काम करेगी. अंतिम संस्कार के लिए नगर निगम ने घाट पर 25 ट्रैक्टर लकड़ी की व्यवस्था की है. इसमें घाघरा शमशान घाट पौने तीन करोड़ रुपए की लागत से निर्मित हुआ है, उसके बावजूद खुले में शवों को जलाया जा रहा है.

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कोरोना कि दूसरी लहर ने बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमित किया है, इससे मौतों की संख्या भी बढ़ गई है. इस बीच नई परेशानी खड़ी हो गई है, राजधानी में हरमू मुक्तिधाम समेत 7 श्मशान घाट और दो शवदाह गृह हैं. लेकिन कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार हरमू मुक्तिधाम किया जा रहा था, लेकिन संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह कम पड़ने लग, मजबूरी में घाघरा में स्वर्णरेखा नदी के तट पर खुले में लोगों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है. हालांकि घाघरा में 3 करोड़ रुपए की लागत से बना शवदाह गृह मृतप्राय स्थिति में है, नगर निगम ने समय रहते इसे दुरुस्त कर लिया होता तो आज संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार खुले में नहीं करना पड़ता.
नगर निगम सुपरवाइजर शंकर चौबे ने कहा कुल मिलाकर 35 से 40 कोविड-19 संक्रमित शवों का देर रात तक अंतिम संस्कार 2 दिन में किया गया. नगर निगम ने तीन शिफ्ट में कर्मचारियों को लगाया गया है. किसी भी तरह का शवों को जलाने में कोई व्यवस्था ना हो, इसके लिए कर्मचारियों सहित शव को जलाने की जो प्रक्रिया होती है उसके लिए भी अलग से व्यवस्था की गई है. नगर निगम के कर्मचारी संजय कुमार ने बताया 25 ट्रैक्टर लकड़ी स्टोर किया गया है. जलावन के साथ-साथ अंतिम संस्कार में जो प्रक्रिया होती है, उसे पूरा करने के लिए भी सामग्री इकट्ठा की गई है.
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