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COVID-19: केंद्र की तर्ज पर हेमंत सरकार भी कर सकती है आर्थिक पैकेज की घोषणा!
Ranchi News in Hindi

Prerana Kumari | News18Hindi
Updated: April 4, 2020, 7:54 PM IST
COVID-19: केंद्र की तर्ज पर हेमंत सरकार भी कर सकती है आर्थिक पैकेज की घोषणा!
झारखंड में नई सरकार आने के बाद से मुख्यमंत्री सहित वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर चिंता जता चुके हैं. (फाइल फोटो)

अर्थशास्त्री हरेश्वर दयाल ने कहा कि अगर बीते वित्तीय वर्ष को छोड़ दें तो लगातार साल 2015 से लेकर 2018-19 के बीच राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं रही है. इस दौरान राज्य की औसत ग्रोथ रेट 5.7 प्रतिशत रही थी.

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रांची. कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण से पूरे देश की अर्थव्यस्था (Economy) पर गहरा असर पड़ रहा है. खासकर झारखंड जैसा राज्य इससे अधिक प्रभावित है क्यूंकि राज्य की वित्तीय स्थिति पहले से भी ठीक नहीं है. राज्य में नई सरकार आने के बाद से मुख्यमंत्री सहित वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर चिंता जता चुके हैं. आलम यह था कि बीते 2 मार्च को विधानसभा की कार्रवाई के बीच हेमंत सरकार ने पिछली सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला बोलते हुए श्वेत पत्र जारी किया. इसके कुछ ही दिनों बाद पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा हो गई. लॉकडाउन का हमारी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ने वाला है, इसलिए केंद्र सरकार ने 1.7 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की. ये पैकेज 21 दिनों के इस लॉकडाउन के दौरान बिगड़ने वाली आर्थिक स्थिति को सुधारने में मददगार साबित होगा.

लॉकडॉउन का झारखंड की अर्थव्यवस्था पर कितना असर
अब बात झारखंड की करें तो ये सवाल उठना लाजमी है कि जब प्रदेश की वित्तीय स्थिति पहले से ही खराब बताई जा रही हो तो इस परिस्थति में राज्य की आर्थिक स्थिति पर कितना प्रभाव पड़ेगा?

इस सवाल पर झारखंड की अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले अर्थशास्त्री हरेश्वर दयाल कहते हैं, 'अगर बीते वित्तीय वर्ष को छोड़ दें तो लगातार साल 2015 से लेकर 2018-19 के बीच राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं रही है. इस दौरान राज्य की औसत ग्रोथ रेट 5.7 प्रतिशत रही थी. वैश्विक मंदी के इस दौर में झारखंड जो भारत का एक छोटा सा राज्य है वह भी अछूता नहीं है. ऊपर से कोरोना की वजह से हुई लॉकडाउन का असर हमारी वित्तीय स्थिति पर पड़ना भी स्वाभाविक है. पूरे देश में उत्पादन ठप हो चुका है, इसे रिकवर करते हुए अगले कुछ महीने निकल जाएंगे. उत्पादन कम होने की वजह से इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा डिमांड भी काफी कम हो गई है. हमें पता है कि ऊर्जा की 50 प्रतिशत से ज्यादा डिमांड कमर्शियल इंडस्ट्रीज को होती है, जो कि अभी लॉकडाउन की वजह से बंद है. ऐसे में झारखंड के लिए आने वाला वित्तीय वर्ष भी काफी मुश्किलों भरा होगा.'



क्या झारखंड को भी आर्थिक पैकेज की है जरूरत?


हरेश्वर दयाल कहते हैं, 'मुझे लगता है राज्य को दो तरह के पैकेज की जरूरत है. एक दिहाड़ी मजदूरों और उनके जैसे अन्य जरूरतमंद तबके के लिए और दूसरा राज्य कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए. इसके साथ ही सरकार को और खर्च करने की जरूरत है.'

इसी से मिलते जुलते सवाल पर कि क्या केंद्र सरकार की तर्ज पर झारखंड सरकार भी आर्थिक पैकेज की घोषणा करने वाली है, राज्य के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि लॉकडाउन के बाद स्थिति बिगड़ने और जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार ऐसा करने की सोच सकती है. सरकार उस दिशा में सोच रही है. हालांकि राज्य को आर्थिक पैकेज की जरूरत नहीं है. फिलहाल सरकार का फोकस स्वास्थ और अन्न पर है और सरकार दोनों व्यवस्था सुनिश्चित करेगी.

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First published: April 4, 2020, 7:10 PM IST
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