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कोरोना लॉकडाउन का असर! खाली होने के कगार पर झारखंड के ब्लड बैंक
Ranchi News in Hindi

Upendra Kumar | News18 Jharkhand
Updated: March 26, 2020, 5:06 PM IST
कोरोना लॉकडाउन का असर! खाली होने के कगार पर झारखंड के ब्लड बैंक
रिम्स के ब्लड बैंक में फिलहाल 400 यूनिट की जगह सिर्फ 160 यूनिट ब्लड है

हमेशा अपने स्टॉक में 400 यूनिट ब्लड (Blood) रखने वाले रिम्स (RIMS) के ब्लड बैंक में फिलहाल सिर्फ 160 यूनिट और सदर अस्पताल रांची (Ranchi Sadar Hospital) के ब्लड बैंक में 150 की जगह महज 60 यूनिट ब्लड बचा है. कुछ यही हाल राज्य के अन्य ब्लड बैंकों का भी है.

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रांची. कोरोना (Corona) के बढ़ते खतरे से देश को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra MOdi) ने 21 दिनों के लॉकडाउन (Lockdown) की घोषणा की है. इसका सीधा असर राज्य के ब्लड बैंकों (Blood Banks) पर पड़ा है. लॉकडाउन के चलते ज्यादातर गैर सरकारी संगठनों ने रक्तदान शिविरों (Blood Donation Camps) को टाल दिया है. वहीं वालंटियर रक्तदाता भी रक्तदान करने नहीं पहुंच रहे हैं. ऐसे में हमेशा अपने स्टॉक में 400 यूनिट ब्लड रखने वाले रिम्स (RIMS) के ब्लड बैंक में फिलहाल सिर्फ 160 यूनिट और सदर अस्पताल रांची के ब्लड बैंक में 150 की जगह महज 60 यूनिट ब्लड बचा है. कुछ यही हाल राज्य के अन्य ब्लड बैंकों का भी है.

इन मरीजों को ब्लड की सख्त जरूरत 

ब्लड की कमी से सबसे ज्यादा परेशानी थैलसीमिया, हिमोफिलिया और सिकल सेल एनीमिया के मरीजों को होगा. क्योंकि इन्हें समय-समय पर ब्लड चढ़ाना पड़ता है. सिर्फ रिम्स में थैलसीमिया-हिमोफिलिया के मरीजों के लिए हर माह 600 यूनिट ब्लड की जरूरत होती है. वहीं सदर अस्पताल के डे केयर सेंटर को हर माह 300 यूनिट की जरूरत होती है. इसके अलावे जरूरी सर्जरी, सिजेरियन प्रसव, दुर्घटना के शिकार लोगों के जीवन को बचाने के लिए भी खून की जरूरत होती है.

लॉकडाउन के चलते कम हुआ ब्लड कलेक्शन



ब्लड बैंकों में खून की कमी की वजह लॉकडाउन को बताते हुए रिम्स ब्लड बैंक की हेड डॉ. सुषमा बताती हैं कि पहले जहां हर दिन 60 से 80 यूनिट तक ब्लड डोनेशन कैम्प से मिल जाया करता था, वहीं आज यह घटकर 30 से 35 यूनिट तक आ गया है. डॉ सुषमा कहती हैं कि रिम्स में कोरोना के चलते टाले जा सकने वाले सारे ऑपरेशन को आगे के लिए टाल दिये गये हैं. इसलिए फिलहाल रिम्स ब्लड बैंक में कुछ यूनिट ब्लड बचा हुई है. अन्यथा स्थिति बेहद विकट हो जाती.

स्वास्थ्य विभाग सिर्फ कागजों पर कर रहा उपाय, रेड क्रॉस भी बना सफेद हाथी

राज्य में ब्लड बैंकों को नियंत्रण करने वाली संस्था जेएसएसीएस ने रक्तदान को लेकर सिर्फ एक सर्कुलर जारी कर अपने कर्तव्यों को पूरा हुआ मान लिया है. इसके तहत 4-5 लोगों के ब्लड डोनेशन कैम्प ऑर्गनाइज कराने को कहा गया है. वह भी इस हिदायत के साथ कि डोनर में सर्दी व खांसी के लक्षण न हो, यह भी सुनिश्चित करा लिया जाए. संकट की इस घड़ी में जब रेड क्रॉस सोसाइटी को बढ़ चढ़ कर काम करना चाहिए था, लेकिन रांची रेड क्रॉस सोसाइटी भी मानो सोया हुई है.

रेड क्रॉस सोसाइटी,रांची के एक्सक्यूटिव कमिटी के सदस्य डॉ अशोक प्रसाद निराश भरे भाव से कहते हैं कि दुखद है कि संकट के इस समय में उन्होंने कमिटी के समक्ष कई प्रस्ताव रखे थे, जिसमे रेड क्रॉस की ओर से सैनिटाइजर, मास्क बांटने के अलावा रक्तदान शिविर आयोजन करने का प्रस्ताव था,  पर कमिटी के पदाधिकारियों ने उनपर ध्यान नहीं दिया.

झारखंड थैलसीमिया फाउंडेशन निभा रहा कर्तव्य 

हालांकि झारखंड थैलसीमिया फाउंडेशन से जुड़े समाजसेवी अतुल गेडा संकट के इस दौर में भी हर दिन सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदाताओं को बुलाकर न सिर्फ रक्तदान करा रहे हैं, बल्कि यह भरोसा भी दिलाते हैं कि थैलसीमिया के बच्चों को और इमरजेंसी के मरीजों को रक्त की कमी नहीं होने दी जाएगी.

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First published: March 26, 2020, 5:05 PM IST
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