अपना शहर चुनें

States

Corona Warriors का सम्मान तो दूर, वेतन के भी लाले, भुखमरी का हो रहे हैं शिकार

रांची में कोरोना वॉरियर्स चार महीने से वेतन नहीं मिला है.  (सांकेतिक फोटो)
रांची में कोरोना वॉरियर्स चार महीने से वेतन नहीं मिला है. (सांकेतिक फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) कोरोना वारियर्स (Corona warriors) को सम्मान देने की बात करते हैं. लेकिन झारखंड (Jharkhand) की राजधानी रांची (Ranchi) में कोरोना वॉरियर्स को चार महीने से वेतन (Salary) तक नहीं मिल रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 19, 2021, 6:09 PM IST
  • Share this:
रांची. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) लगातार कोरोना वॉरियर्स (Corona warriors) को सम्मान देने की बात करते हैं. कोरोना वैक्सीन (Corona vaccine) आने के बाद भी कोरोना वॉरियर्स को इसकी पहली डोज दी जा रही है. लेकिन झारखंड (Jharkhand) की राजधानी रांची (Ranchi) में कोरोना से हर दिन दो चार हो रहे स्वास्‍थ्य कर्मियों को सैलरी भी नहीं मिल रही है. यह हाल रांची के सदर अस्पताल में कोरोना सैम्पल की जांच में लगे लैब तकनीशियन और डेटा एंट्री ऑपरेटर का है.

पांच मिलियन सैंपल जांचने में निभाई अहम भूमिका
झारखंड में कोरोना सैम्पल जांच के लिए 5 मिलियन यानी कि 50 लाख से ऊपर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले लैब टेक्नीशियन हकदार तो पुरस्कार के थे पर सम्मान और पुरस्कार तो दूर 4 महीने से उन्हें वेतन नहीं मिला है. अब स्थिति यह कि किसी को उसका मकान मालिक घर खाली करने को कह रहा है तो किसी को उधार राशन देने के लिए दुकानदार तैयार नहीं है. सदर अस्पताल में कोरोना जांच के आंकड़े की डेटा एंट्री करने वाली पूजा कहती हैं कि भाई के इलाज के लिए कर्ज लिया था, जिसे वह चुका नहीं पा रहीं, अब तो कांटाटोली में जिस किराये के घर में वह रहती है वहां मकान मालिक भी घर खाली करने के लिए बोलता है.

सैफ अली खान की वेब सीरीज पर स्वामी की धमकी- आपत्तिजनक सीन नहीं हटाये तो झारखंड में भी होगा तांडव




पूजा जैसा दर्द झेल रहे हैं कई लैब तकनीशियन
रांची के सदर अस्पताल में कोरोना संदिग्धों के लिये सैम्पल की जांच करने वाले नवनीत, संजय हों या फिर कोरोना की हर रिपोर्ट को कंप्यूटर पर एंट्री कर रही पूजा, सबकी समस्या एक ही है. कोरोना काल में दिन- रात काम करने के बावजूद सैलरी का नहीं मिलना. पूजा कहती हैं कि भाई के इलाज के लिए कर्ज लिया था, लेकिन पर समय से सैलरी ही न मिले तो क्या किया जा सकता है. महंगाई के इस दौर में जब कोरोना पीक पर था और प्रति मिलियन जांच काफी कम तो कोरोना का चक्र तोड़ने के लिए इन लैब टेक्नीशियन, डाटा एंट्री ऑपरेटरों को बहाल किया गया था. परिवार और गृहस्थी की गाड़ी चलाने का दबाव ही था जब हर कोई लैब की नौकरी से मुंह मोड़ रहा था तब इन्होंने सेवा दी. अब वेतन नहीं मिल रहा है.

क्या कहते हैं हुक्मरान
न्यूज 18 ने इस सवाल को हुक्मरान तक उठाया तो रांची के सिविल सर्जन डॉ. वीबी प्रसाद ने भरोसा दिलाया कि 2-3 दिन में सभी को सैलरी दे दी जाएगी, उन्होंने माना कि मुख्यालय से राशि आने में देर हुई है.

बकाया सैलरी देकर ही इन्हें पुरस्कार देने जैसी खुशियां दे सकता है विभाग
झारखंड में 5 मिलियन से ज्यादा कोरोना जांच के आंकड़े को पार किया है और राज्य में रिकवरी रेट 98% के ऊपर है, तो उसमें इन लैब तकनीशियनों का भी महत्वपूर्ण योगदान है. ऐसे में हम अगर इन्हें इंसेंटिव न दे सकें तो कम से कम इतना जरूर हो कि इनकी सैलरी समय पर मिलती रहे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज