Lockdown-5.0 में झारखंड को कितनी मिलेगी राहत, जानिए कारोबारी और नेताओं को क्या है उम्मीद
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Lockdown-5.0 में झारखंड को कितनी मिलेगी राहत, जानिए कारोबारी और नेताओं को क्या है उम्मीद
झारखंड में Lockdown-5.0 में आर्थिक स्थित को लेकर पक्ष-विपक्ष की एक ही राय (फाइल फोटो)

COVID-19 संकट की वजह से झारखंड की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए झामुमो या बीजेपी, सभी दलों के नेता और कारोबारी सरकार से राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं.

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(ओम प्रकाश)

रांची. झारखंड (Jharkhand) में लॉकडाउन 5.0 (Lockdown 5.0) में कितनी राहत मिलेगी, फिलहाल इस पर सभी की नजर टिकी है. पक्ष-विपक्ष के साथ व्यवसायी वर्ग भी अब रियायत की बात कर रहे हैं, ताकि आर्थिक स्थिति पटरी पर आ सके. शायद यही वजह है कि इस मुद्दे पर सभी के सुर मिल रहे हैं. उम्मीद है कि वैसी दुकानें जहां से छोटे पैमाने पर व्यवसाय होता है और जहां भीड़ नहीं लगती, वे जरूर खुलेंगी. फिलहाल इस मुद्दे पर बैठकों का दौर जारी है और सरकार हर पहलू पर बारीकी से निगाहें जमाए बैठी है.

कंटेनमेंट जोन को छोड़ दिया जाए जाए तो अन्य इलाकों में जन जीवन पटरी पर लाने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधि बढ़ाने को लेकर लगातार कवायद की जा रही है. लॉकडाउन 4.0 में इसकी झलक भी दिख चुकी है. सरकार ने निर्माण क्षेत्रों के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने को लेकर कई अहम फैसले किए और कई दुकानों को भी खोला गया.



'अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार कर रही मंथन'



इधर, उद्योग और लॉकडाउन के दौरान मनरेगा के जरिये लोगों को रोजगार भी दिए जा रहे हैं, जिसका हवाला देते हुए जेएमएम प्रवक्ता मनोज पाण्डेय ने कहा कि कोरोना को लेकर सरकार गम्भीर है. साथ ही अर्थव्यवस्था को लेकर भी लगातार मंथन कर रही है. उम्मीद है कि इसे लेकर कुछ रियायतें सरकार जरूर लोगों को देगी. मनोज पाण्डेय ने सार्वजनिक परिवहन और मॉल्स के खुलने पर कहा कि इस पर फिलहाल कोई सहमति नहीं बनी है.

'आर्थिक मोर्चे पर काम करने की जरूरत'

प्रदेश की मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष दीपक प्रकाश के भी सुर सत्ताधारी दल की बातों से मेल खाते नजर आए. उन्होंने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ-साथ अब आर्थिक मोर्चे पर भी काम करने की आवश्यकता है, ताकि लोगों को रोजगार मिल सके. हालांकि इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर लोगों को और जागरूक करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में व्यवसाय पर लगा ब्रेक खत्म हो, इसे लेकर चैंबर भी प्रयासरत है.

इधर, झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष कुणाल आजमानी का कहना है कि जहां भी ज्यादा भीड़-भाड़ ना हो कम से कम वैसे व्यवसाय को शुरू करने की इजाजत देनी चाहिए. इससे रोजगार के साथ साथ सरकार को भी राजस्व मिल सकेगा. बहरहाल उम्मीद है कि सरकार कंटेनमेंट जोन को छोड़ शहर के अन्य हिस्सों में थोड़ी रियायत देगी, ताकि जिंदगी के साथ-साथ आर्थिक गतिविधि को भी पटरी पर लाई जा सके.

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First published: May 30, 2020, 3:32 PM IST
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