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क्रिकेटर सुशांत मिश्रा को मां के हाथों की चिकेन करी पसंद, बेटे की कामयाबी पर माता-पिता को गर्व
Ranchi News in Hindi

News18 Jharkhand
Updated: February 4, 2020, 5:59 PM IST
क्रिकेटर सुशांत मिश्रा को मां के हाथों की चिकेन करी पसंद, बेटे की कामयाबी पर माता-पिता को गर्व
क्रिकेटर सुशांत मिश्रा की कामयाबी पर मां ममता मिश्रा और पिता समीर मिश्रा को गर्व है

बेटे सुशांत मिश्रा की कामयाबी पर खुशी जाहिर करते हुए मां ममता मिश्रा कहती हैं कि क्रिकेट खेलकर वह जब भी घर आता है, तो सबसे पहले मेरे हाथों की चिकन करी का डिमांड करता है

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रांची. दक्षिण अफ्रीका में 17 जनवरी से चल रहे अंडर-19 विश्व कप टूर्नामेंट (Under-19 World Cup) का आज पहला सेमीफाइनल भारत (India) और उसके चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान (Pakistan) के बीच खेला जा रहा है. ऐसे में मैच को लेकर रोमांच बढ़ा हुआ है. लेकिन झारखंड के क्रिकेट प्रेमियों के बीच रोमांच दोगुना होने का एक और कारण है. साउथ अफ्रीका के पॉचेफस्ट्रम के सेनवेस पार्क में खेले जा रहे इस मैच में रांची का लाल सुशांत मिश्रा भी खेल रहा है. सुशांत मिश्रा (Sushant Mishra) मध्यम गति के तेज गेंदबाज हैं.

मैच में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर बैटिंग करने का निर्णय लिया. सुशांत मिश्रा ने पहले ओवर की छठी गेंद पर पाकिस्तान का पहला विकेट उखाड़ दिया. सुशांत की इस कामयाबी का जश्न रांची में बैठे उनके माता-पिता मना रहे हैं. घर में खुशी का माहौल है. माता-पिता टीवी और मोबाइल पर नजरें गड़ाए मैच का लुत्फ उठा रहे हैं. मां की आंखों में खुशी है, तो पिता की आंखों में बेटे के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद.

सुशांत को मां के हाथों की चिकेन करी पसंद है

मां ममता मिश्रा बेटे की कामयाबी पर खुशी जाहिर करते हुए कहती हैं,'क्रिकेट खेलकर वह जब भी घर आता है, तो सबसे पहले मेरे हाथों की चिकन करी का डिमांड करता है.' पिता समीर मिश्रा के मुताबिक सुशांत में क्रिकेट को लेकर लगन और प्रतिभा बचपन से ही दिखने को मिली. आज के मैच को पूरा विश्व देख रहा है. सुशांत से चार-पांच विकेट लेने की उम्मीद है.

जहीर खान को मानते हैं अपना आदर्श

23 दिसंबर 2000 को रांची में जन्मे सुशांत मिश्रा अपना आदर्श भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान और वर्तमान तेज गेंदबाज बुमराह को मानते हैं. रांची के डीएवी पुंदाग के छात्र सुशांत मिश्रा अपने कॉलनी शालीमार बाग के बच्चों के आदर्श हैं. सुशांत जब भी कॉलोनी में होते हैं, हर दिन बच्चों के साथ कैंपस में प्रैक्टिस करते हैं. हर बच्चे के साथ भाई जैसा व्यवहार ने उसे सबका प्रिय बना दिया है. कॉलोनी के बड़े बुजुर्ग भी उसकी सफलता की कामना करते हैं.

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First published: February 4, 2020, 5:59 PM IST
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