Cyclone YAAS Effect : सोनाहातू-तमाड़ को जोड़ने वाला कांची नदी पर बना पुल धंसा

यह है कांची नदी पर बने पुल की हालत.

यह है कांची नदी पर बने पुल की हालत.

यह पुल हराडीह बूढ़ाडीह घाट पर लगभग 2 साल पहले बना था. करोड़ों रुपये की लागत से बना 600 फुट लंबा यह पुल गुरुवार को धंस गया. जिला प्रशासन ने फिलहाल पुल से आवागमन बंद करा दिया है.

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रांची. चक्रवाती तूफान YAAS के असर की वजह से झारखंड (Jharkhand) में हुई बारिश से बरसाती नदियां उफनने लगी हैं. बारिश इतनी ज्यादा हुई कि कई जगहों पर सड़कें बह गईं, कुछ सड़कों में दरार पड़ गए और कुछ पुल टूट गए. सोनाहातू (Sonahatu) और तमाड़ (Tamar) प्रखंड को जोड़ने वाला कांची नदी (Kanchi River) पर बना पुल भी धंस गया.

पुल धंसने से तमाड़ और सोनाहातू की दूरी 10 किलोमीटर बढ़ी

यह पुल हराडीह बूढ़ाडीह घाट पर लगभग 2 साल पहले बना था. करोड़ों रुपये की लागत से बना 600 फुट लंबा यह पुल गुरुवार को धंस गया. जिला प्रशासन ने फिलहाल पुल से आवागमन बंद करा दिया है. इस पुल से हर दिन 20 गांवों के करीब 3 हजार लोग रोज आना-जाना करते थे. अब तमाड़ से सोनाहातू आने-जाने के लिए लोगों को करीब 10 किलोमीटर ज्यादा दूरी तय करके हराडीह पुल होकर आवागमन करना होगा.

महज 3-4 साल पहले बना था यह पुल
आसपास के लोग बताते हैं कि कांची नदी से बालू का अवैध खनन लगातार किया जा रहा था, जिसके कारण पुल कमजोर हो रहा था. उनका कहना है कि अगर इस अवैध खनन पर प्रशासन वक्त रहते कार्रवाई करता तो यह पुल धंसने से बच जाता. आपको बता दें कि यह पुल महज 3 से 4 साल पहले बना था. इस लिहाज से निर्माण और रख-रखाव पर सवाल उठना स्वाभाविक है. बहरहाल अब देखने वाली बात होगी कि इस घटना से शासन प्रशासन और निर्माण कंपनियां कितना सबक लेते हैं.

इंजीनियरिंग के साथ प्रशासनिक अमले पर बड़ा सवाल

हाड़ाडीह बूढ़ाडीह पुल के धंसने से इंजीनियरिंग और प्रशासनिक अमले के खिलाफ ग्रामीणों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं. दूसरी ओर, बालू माफिया और प्रशासन की मिलीभगत की बात भी ग्रामीण कह रहे हैं. आपको ध्यान दिला दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मुताबिक, पुल के पिलर या किसी संरचना के आसपास से बालू उत्खनन नहीं किया जा सकता. इस पर निगरानी रखने की जिम्मेवारी माइनिंग अफसर और सीओ की होती है, लेकिन इस घटना को देखकर ऐसा लगता है कि अफसरों ने बालू माफिया को पूरी नदी से बालू उठाने की छूट दे रखी है.

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