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डीसी अंकल, बहुत ठंड लगती है, प्लीज स्कूल बंद कराओ

डीसी अंकल, बहुत ठंड लगती है, प्लीज स्कूल बंद कराओ

कड़ाके की ठंड के बावजूद रांची के निजि स्कूल क्लास की टाइमिंग को लेकर संवेदनशील नहीं दिख रहे. हालत यह है कि सुबह सात बजे 6-7 डिग्री तापमान के बीच ठिठुरती ठंड में इन बच्चों को बस स्टॉप पर खड़ा रहना पड़ता है. ये प्रबंधन जिला प्रशासन के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे हैं.

कड़ाके की ठंड के बावजूद रांची के निजि स्कूल क्लास की टाइमिंग को लेकर संवेदनशील नहीं दिख रहे. हालत यह है कि सुबह सात बजे 6-7 डिग्री तापमान के बीच ठिठुरती ठंड में इन बच्चों को बस स्टॉप पर खड़ा रहना पड़ता है. ये प्रबंधन जिला प्रशासन के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे हैं.

कड़ाके की ठंड के बावजूद रांची के निजि स्कूल क्लास की टाइमिंग को लेकर संवेदनशील नहीं दिख रहे. हालत यह है कि सुबह सात बजे 6-7 डिग्री तापमान के बीच ठिठुरती ठंड में इन बच्चों को बस स्टॉप पर खड़ा रहना पड़ता है. ये प्रबंधन जिला प्रशासन के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे हैं.

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कड़ाके की ठंड के बावजूद रांची के निजि स्कूल क्लास की टाइमिंग को लेकर संवेदनशील नहीं दिख रहे. हालत यह है कि सुबह सात बजे 6-7 डिग्री तापमान के बीच ठिठुरती ठंड में इन बच्चों को बस स्टॉप पर खड़ा रहना पड़ता है. ये प्रबंधन जिला प्रशासन के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे हैं.

सात बजे सुबह सड़क पर ठिठुरते मासूम

सुबह सात बजे रांची के चौक चौराहों पर लोग आग जलाकर अपनी ठंड को कम करते दिखते हैं तो दूसरी तरफ बस स्टॉप पर मासूम अपनी स्कूल बस का इंतजार करते हैं. सुबह होते ही सरपट दौड़ने लगती हैं ये बसें. कहीं सात बजे कहीं पौने आठ तो कहीं साढ़े सात. उस वक्त इन बच्चों के चेहरे से लगता है कि इनको किसी गलती की सजा दी जा रही है.

भाता नहीं तड़के उठ कर तैयार होना

बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रहे बच्चों से जब ईटीवी/प्रदेश18 की टीम ने बात की तो उन्होंने खुल कर अपनी परेशानी शेयर की.  कहा कि सुबह रजाई से निकल पर तैयार होने का मन ही नहीं करता. इतनी ठंड में उठ कर स्कूल के लिए तैयार होना और फिर बस का इंतजार किसी सजा से कम नहीं. डीसी अंकल से बच्चों ने गुहार की कि या तो स्कूल हफ्ते भर बंद कर दें या फिर समय में बदलाव करें.

ये स्कूल भी सूची में

हम किसी ऐरे गैरे स्कूल की बात नहीं कर रहे हैं. इस सूची मे रांची के वो तमाम स्कूल हैं जो हर कोड ऑफ कंडक्ट को मानने की बात करते हैं. उनकी पढ़ाई की चर्चा न केवल रांची बल्कि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी होती है. मसलन जब हमने जानना चाहा तो सेकरेट हर्ट, डीएवी सभी ग्रुप, सेंट थॉमस, सेंट मेरी सहित कई बड़े स्कूल के मासूम बच्चे सुबह सवा सात बजे रांची की सड़कों पर दिखे.

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बच्चों के साथ खड़े अभिभावकों से जब हमने बात की तो उन्होंने कहा कि हर साल ठंड के समय में बदलाव होता रहा है. हमें उम्मीद थी कि स्कूल अपना शेड्यूल चेंज करेगा. पर इस बार ऐसा नहीं हुआ. वहीं बच्चे को बस में बैठाने आयी एक मां ने कहा कि क्रिसमस पर बस दो दिन की छुट्टी कर इसी समय में छुट्टी देनी चाहिए.

बहरहाल, इस ठंड में बच्चे जहां डीसी अंकल से स्कूल बंद कराने की मांग कर रहे हैं तो स्कूल प्रबंधन है कि डीसी साहब के उस आदेश को भी मानने को तैयार नहीं है जिसमें आठवीं तक की कक्षाएं नौ बजे के बाद शुरु करने की बात कही गयी है.

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