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झारखंड में किसान ऋणमाफी योजना का ढोल, आंकड़ों से खुल गई सरकार की पोल

हेमंत सरकार ने पहले 2 लाख के बजाय 50 हजार तक का ऋण माफ करने का ऐलान किया.

हेमंत सरकार ने पहले 2 लाख के बजाय 50 हजार तक का ऋण माफ करने का ऐलान किया.

झारखंड में हेमंत सरकार गठन के करीब 3 साल के बाद भी राज्य के महज 4 लाख किसानों की ही ऋणमाफी हो पायी है, जबकि 5 लाख किसान ...अधिक पढ़ें

रांची. झारखंड में किसानों की ऋण माफी को लेकर ढोल पीटने वाली गठबंधन सरकार की पोल खुल गई है. सरकार गठन के करीब 3 साल के बाद राज्य के महज 4 लाख किसानों की ऋणमाफी हो पायी है, जबकि 5 लाख किसानों को 50 हजार रुपया तक की ऋणमाफी का इंतजार आज भी है. विभाग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के द्वारा की गई समीक्षा के बाद अब विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है. .

किसानों से ऋण माफी का वादा कर सत्ता पर काबिज होने वाली हेमंत सरकार की पोल खुल गई है. ऋणमाफी का ढोल पीटने वाली गठबंधन सरकार अपने कार्यकाल के करीब 3 साल बाद भी अपने ही लक्ष्य से 5 लाख पीछे चल रही है. ऋणमाफी योजना में बैंकों की सुस्ती और कागजी प्रक्रिया के मकड़जाल ने किसानों के सपने पर पानी फेर दिया है.

कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबुबक्कर सिद्धिख का भी मानना है कि सरकार ने जिस सोच के साथ इसकी शुरुआत की थी, उसमें कई तरह के अड़चन देखने को मिल रहे हैं. किसानों की सूची उपलब्ध होने के बाद बैंकों को जो काम सौंपा गया था, वो अभी लंबित है. बैंकों ने अपनी परेशानी को विभाग के समक्ष रखा. परेशानी को दूर करने के लिये विभाग ने पहल भी तेज कर दी है.

झारखंड में किसानों की ऋणमाफी का सच  

कांग्रेस का चुनावी वादा था किसानों की ऋणमाफी

किसानों का 2 लाख रुपया तक का ऋण माफ करने का किया गया था वादा

सरकार ने पहले 2 लाख के बजाय 50 हजार तक का ऋण माफ करने का एलान किया

सरकार ने 9 लाख 7 हजार 753 किसानों को ऋण माफी के लिये चयन किया

लेकिन बैंकों के द्वारा मात्र 6 लाख 6 हजार कही डाटा अपलोड हो सका है

6 लाख 6 हजार में से भी सरकार मात्र 4 लाख किसानों का ऋणमाफी कर पाई है

CM की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को लगी है क्लास

किसानों का आधार कार्ड नहीं होना बैंकों के लिये सबसे बड़ी परेशानी

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आदेश बगैर आधार के बैंक प्रक्रिया पूरी करे या आधार बनाने को लेकर चले विशेष अभियान

ई KYC प्रक्रिया को भी सरल करने का निर्देश

ऋणमाफी कांग्रेस का बड़ा चुनावी एजेंडा

किसानों की ऋणमाफी कांग्रेस बड़ा चुनावी एजेंडा रहा है. छत्तीसगढ़ से राजस्थान तक जैसे राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद किसानों को ये तौहफा मिल चुका है. लेकिन झारखंड में हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार में ये अब असफल साबित हो रहा है. हैरान करने वाली बात ये है कि कृषि विभाग कांग्रेस के पास होने के बावजूद ऋणमाफी की योजना बीच भवर फंसी है. यही वजह है कि पार्टी के अंदर से भी इसको लेकर अब सवाल उठने लगे हैं.

कांग्रेस प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने इसको लेकर पत्र भी लिखा है. उनका साफ कहना है कि इस मामले विभाग और मंत्री की गंभीरता नहीं दिख रही है. समीक्षा के साथ किसानों को ऋणमाफी का लाभ मिलना चाहिये.

झारखंड में KCC लोन लेने वाले किसानों की संख्या लाखों में है. राज्य में शायद ही कोई किसान का परिवार होगा ,जिसने  KCC लोन नहीं लिया हो. सरकार के द्वारा ऋणमाफी की घोषणा के बाद एक उम्मीद जगी थी. लेकिन सरकार ने पहले  2 लाख के बजाय 50 हजार रुपया की ऋणमाफी का झटका दिया और अब किसानों को वो भी नसीब नहीं हो पा रहा है.

बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा कहते है कि सरकार ने जिस तरह से यू टर्न लिया है, वो उसकी मंशा को बताने के लिये काफी है. शुरू से ही सरकार ने किसानों को मरहम लगाने का राजनीतिक ढोंग किया. किसानों की आंख में धूल झोंकना राजनीति हुई.

झारखंड में ऋणमाफी की राह में रोड़े ही रोड़े हैं. कही आधार कार्ड का रोड़ा है, कही NPA का रोड़ा है, कहीं एक परिवार से दो भाइयों की ऋणमाफी का रोड़ा है, तो कही कागजी प्रक्रिया का रोड़ा. अब ऐसे में ऋणमाफी का सपना भला कैसे हो सकता है पूरा.

Tags: CM Hemant Soren, Farmer, Hemant soren government, Ranchi news

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