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Delhi: नक्सल समस्या पर बैठक में शामिल हुए CM हेमंत, कहा- नक्सलियों के खिलाफ जरूर जीतेंगे युद्ध

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि लगातार चलाए जा रहे अभियान के चलते नक्सलवाद अब झारखंड के केवल कुछ हिस्सों तक सिमट कर रह गया है

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि लगातार चलाए जा रहे अभियान के चलते नक्सलवाद अब झारखंड के केवल कुछ हिस्सों तक सिमट कर रह गया है

Delhi News: नक्सल समस्या पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बुलाई गई बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उग्रवादी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है जिसके चलते राज्य में उग्रवादियों की उपस्थिति मुख्य रूप से पारसनाथ पहाड़, बूढ़ा पहाड़, सरायकेला, खूंटी, चाईबासा, कोल्हान क्षेत्र और बिहार की सीमा के कुछ इलाके तक सीमित रह गई है. वो दिन दूर नहीं जब इन स्थानों से भी वामपंथी उग्रवाद का सफाया किया जा सकेगा

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) रविवार को दिल्ली (Delhi) के विज्ञान भवन में ‘वामपंथी उग्रवाद’ पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में शामिल हुए. बैठक में उन्होंने कहा कि राज्य में नक्सली वारदातों की संख्या में कमी आयी है. इस वर्ष 715 उग्रवादी गिरफ्तार किये गए हैं, जबकि 18 उग्रवादी मारे गए हैं. वहीं, 27 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. उन्होंने केंद्र सरकार से पेंशन योजनाओं (Pension Scheme) की समीक्षा करने का आग्रह किया है.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में 195 उग्रवादी घटनाएं हुई थीं. यह संख्या वर्ष 2020 में घटकर 125 रह गयी है. वर्ष 2016 में उग्रवादियों द्वारा 61 आम नागरिकों की हत्या की गयी थी, वर्ष 2020 में यह संख्या 28 रही. इस अवधि में कुल 715 उग्रवादियों की गिरफ्तारी हुई है. उक्त अवधि में पुलिस के साथ मुठभेड़ में 18 उग्रवादियों को मार गिराया गया था.

चार स्थानों में सिमटे नक्सली

मुख्यमंत्री ने कहा कि उग्रवादी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है. इन अभियानों के फलस्वरूप राज्य में उग्रवादियों की उपस्थिति मुख्य रूप से पारसनाथ पहाड़, बूढ़ा पहाड़, सरायकेला, खूंटी, चाईबासा, कोल्हान क्षेत्र और बिहार की सीमा के कुछ इलाके तक सीमित रह गई है. वो दिन दूर नहीं जब इन स्थानों से भी वामपंथी उग्रवाद का सफाया किया जा सकेगा.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 और 2021 के अगस्त तक 27 उग्रवादियों द्वारा आत्मसमर्पण किया गया है. राज्य की आकर्षक आत्मसमर्पण नीति का प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है. कम्युनिटी पुलिसिंग के द्वारा भटके युवाओं को मुख्य धारा में वापस लाने का प्रयास हो रहा है. राज्य सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं के लिए ‘सहाय’ योजना लेकर आ रही है, जिसके अंतर्गत इन क्षेत्रों में विभिन्न खेलों के माध्यम से युवाओं और अन्य लोगों को जोड़ा जायेगा.

राशि की मांग करना व्यवहारिक नहीं

सीएम हेमंत ने कहा कि उग्रवाद की समस्या केंद्र और राज्य सरकार दोनों के लिए बड़ी चुनौती है. ऐसी परिस्थिति में केन्द्रीय सुरक्षाबलों की प्रतिनियुक्ति के बदले केंद्र द्वारा राज्य सरकारों से राशि की मांग करना व्यवहारिक प्रतीत नहीं होता है. इस मद में झारखंड के विरुद्ध अब तक 10 हजार करोड़ रुपये का बिल गृह मंत्रालय द्वारा दिया गया है. मेरा अनुरोध होगा कि इन बिलों को खारिज करते हुए भविष्य में इस तरह का बिल राज्य सरकारों को नहीं भेजने का निर्णय भारत सरकार द्वारा लिया जाये.

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में योजनाएं अचानक बंद न हो

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर उग्रवाद के उन्मूलन हेतु कई योजनाएं लागू की गयी हैं. इन योजनाओं से विशेष लाभ भी मिला है, परंतु ऐसा देखा गया है कि कुछ जिलों के लिए इन योजनाओं को अचानक बंद कर दिया गया, जिससे उग्रवाद उन्मूलन की दिशा में किये जा रहे प्रयासों को आघात पहुंचता है. उन्होंने कहा कि अचानक इन योजनाओं को बंद कर देने से नक्सलवाद को पुनः पैर पसारने का मौका मिल सकता है. इसी संदर्भ में विशेष केंद्रीय सहायता के तहत प्रति जिला 3,300 करोड़ रुपये की राशि भारत सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जाती है.

उन्होंने कहा कि प्रारंभ में यह योजना 16 जिलों के लिए स्वीकृत की गयी थी, परंतु इस वर्ष यह योजना मात्र आठ जिलों के लिए जारी रखी गयी है. इसी प्रकार एसआरई योजना से कोडरमा, रामगढ़ और सिमडेगा को बाहर कर दिया गया है. इसलिए मेरा अनुरोध होगा कि दोनों योजनाओं को सभी नक्सल प्रभावित जिलों के लिए अगले पांच वर्षों तक जारी रखा जाये.

मनरेगा मजदूरी दर और पेंशन राशि बढ़े

हेमंत सोरेन ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की दशा को सुधारने में मनरेगा एक कारगर उपाय है. मनरेगा झारखंड में बहुत मजबूती से आगे बढ़ रहा है. परंतु, प्रदेश के श्रमिकों को जो मजदूरी दर मिल रही है, वो देश में सबसे कम है. अन्य राज्यों में 300 रुपये/दिन से ज्यादा मिल रही है, मगर हमारे यहां 200 रुपये भी नहीं है. हमने राज्य की निधि से मजदूरी बढ़ाने का निर्णय लिया है. मेहनतकश झारखंडवासियों को भी मनरेगा के तहत सही मजदूरी मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा के तहत भारत सरकार के द्वारा जो विभिन्न पेंशन योजनाएं चलायी जा रही हैं उसे फिर से देखने की जरूरत है. अभी भी भारत सरकार एक वृद्ध/विधवा/दिव्यांग को प्रति महीने जीवन यापन सहायता के रूप में मात्र 250 रुपये प्रति महीने देती है. नक्सल प्रभावित क्षेत्र जहां जीविकोपार्जन अन्य क्षेत्रों से ज्यादा कठिन है, वहां के लिए तो यह राशि बढ़नी ही चाहिए.

शिक्षा के लिए विद्यालयों की संख्या बढ़े

झारखंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 192 एकलव्य विद्यालय स्वीकृत किये गये हैं, इनमें से 82 उग्रवाद प्रभावित जिलों में स्थापित होंगे. मेरा अनुरोध होगा कि एकलव्य विद्यालय की स्वीकृति हेतु निर्धारित मापदंड में 50 प्रतिशत की शर्त को समाप्त किया जाए, ताकि आदिवासी बहुल ग्रामीण क्षेत्रों को इस योजना का लाभ मिल सके. झारखंड में 261 प्रखंड हैं, परंतु मात्र 203 प्रखंडों में ही केंद्र सरकार की सहायता से कस्तूरबा विद्यालय का निर्माण किया गया.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 57 विद्यालय अपनी निधि से प्रारंभ की है. राज्य की बेटियां इन विद्यालयों में नामांकन चाहती हैं. झारखंड जो सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित है, वहां 100 कस्तूरबा विद्यालयों के लिए केंद्र सरकार सहयोग करे. नक्सल विरोधी अभियान में हमारी सरकार और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय हमेशा बना रहेगा. मैं आशा करता हूं कि हम सब मिलकर इस युद्ध को अवश्य जीत पायेंगे.

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