देवघर जमीन विवाद: सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने पीड़क कार्रवाई पर रोक को जारी रखा

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और उनकी पत्नी अनामिका गौतम (फाइल फोटो)

झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High court) ने अनामिका गौतम के खिलाफ किसी प्रकार की पीड़क कार्रवाई नहीं किए जाने के पूर्व से चल रहे अंतरिम राहत को बराकरार रखा है.

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रांची. देवघर जमीन खरीद विवाद मामले में झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High court) से गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) की पत्नी अनामिका गौतम को बड़ी राहत मिली है. न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने शनिवार को सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को सुनने के बाद जमीन खरीदी से जुड़े सभी मामलों को एकसाथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया. साथ ही कोर्ट ने अनामिका गौतम के खिलाफ किसी प्रकार की पीड़क कार्रवाई नहीं किए जाने के पूर्व से चल रहे अंतरिम राहत को बराकरार रखा है.

इससे पहले बीते 19 जनवरी को देवघर उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री ने सांसद की पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड एलओकेसी धाम की रजिस्ट्री रद्द कर दी थी. साथ ही पत्नी अनामिका गौतम और सांसद पर प्राथमिकी दर्ज करने एवं ईडी जांच का आदेश दिया. उपायुक्त कोर्ट ने यह आदेश एक शिकायत पर सुनवाई करते हुए सुनाया था. डीसी कोर्ट के आदेश पर जिला अवर निबंधक ने सांसद के खिलाफ नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई.

देवघर स्थित चर्चित ऐलोकेसी धाम की रजिस्ट्री ऑनलाइन इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हुई थी. सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी अनामिका गौतम इस कंपनी की प्रॉपराइटर हैं. डीसी कोर्ट ने निबंधन दस्तावेज संख्या 770/29.8.2019 को कपटपूर्ण मानते हुए जमीन के खरीदार, विक्रेता और गवाह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया.



क्या है पूरा मामला?
दरअसल भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी के नाम पर देवघर की एलओकेसी धाम की जमीन 29 अगस्त 2019 को रजिस्टर्ड हुई थी. सांसद की पत्नी पर आरोप है कि उन्होंने सिर्फ 3 करोड़ रुपये देकर जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली, जबकि जमीन की वैल्यू 18.94 करोड़ रुपये है. इस मामले को लेकर देवघर के शशि सिंह और विष्णुकांत झा ने डीसी से शिकायत की थी. इसी शिकायत पर सुनवाई करते हुए उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी ने जमीन की रजिस्ट्री रद्द कर दी.

पीड़क कार्रवाई पर रोक को हटाने की मांग
इधर, रांची में इसी मामले में राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर कर सांसद की पत्नी के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक को हटाने की मांग की थी. इससे पहले दिसंबर में हाईकोर्ट ने अनामिका गौतम को  राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी प्रकार की पीड़क कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया था. साथ ही पूरे मामले में राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया था. इस संबंध में अनामिका गौतम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की मांग की थी. (इनपुट- भुवन किशोर झा)

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