कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ

बदहाली में जीने को मजबूर
बदहाली में जीने को मजबूर

राजधानी रांची के इस्लामनगर के अतिक्रमण प्रभावितों के आवास निर्माण के लिए कैबिनेट द्वारा 33 करोड़ रूपए ख़र्च करने की मंज़ूरी दी गई थी.

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राजधानी रांची के इस्लामनगर के अतिक्रमण प्रभावितों के आवास निर्माण के लिए कैबिनेट द्वारा 33 करोड़ रूपए ख़र्च करने की मंज़ूरी दी गई थी. लेकिन सात महीना बीतने के बावजूद अभी तक निर्माणकार्य की शुरुआत भी नहीं हुई है. इस वजह से पीड़ित परिवारों को परेशानियां झेलनी पड़ रही है.

इस बीच राजधानी में पिछले दो दिनों से जारी बारिश से इस्लामनगर के पीड़ित परिवारों की परेशानियां और भी बढ़ गई हैं. अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान राजकीय पॉलिटेक्निक की ज़़मीन पर आबाद
इस्लामनगर के सैंकड़ों मकानों को छह वर्ष पूर्व गिरा दिया गया था. कोई दूसरा विकल्प न होने के कारण पीड़ित परिवार उसी स्थान पर प्लास्टिक से बने झोंपड़ियों में रहने और बारिश की मार झेलने को मजबूर हैं.

मालूम हो कि एक लम्बे आंदोलन के बाद राज्य मंत्रिमंडल द्वारा इस्लामनगर के पीड़ित परिवारों को उसी स्थान पर बसाने का निर्णय लिया गया था. साथ ही उनके आवास निर्माण के लिए 33 करोड़ रूपए ख़र्च करने की मंज़ूरी मिली थी. लेकिन धरातल पर अभी तक इनके आवास निर्माण के लिए एक ईंट भी नहीं रखी गई है. कैबिनेट के निर्णय के बाद अतिक्रमण प्रभावित परिवारों के आवास निर्माण के लिए ज़मीन की नापी करने के साथ-साथ डीपीआर भी तैयार किया गया. लेकिन अब तक शिलान्यास नहीं हो सका है.
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