झारखंड में TAC के गठन पर गांठ बरकरार, सरकार और राजभवन में उभरा मतभेद

हेमंत सरकार तीसरी बार टीएसी से जुड़ी फाइल राजभवन को भेजने की तैयारी में है. (फाइल फोटो)

देश के 28 राज्यों में से 10 राज्य पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में शामिल हैं, जिनमें से एक झारखंड भी है. ऐसे राज्यपाल की सहमति के बिना जनजातीयों (Tribals) से संबंधित कोई भी निर्णय झारखंड सरकार (Jharkhand Government) नहीं ले सकती.

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    रिपोर्ट- अविनाश कुमार

    रांची. झारखंड में जनजातीय परामर्शदात्री परिषद (TAC) के गठन की गांठ खुल नहीं पा रही है. अब तक दो बार इसकी फाइल राजभवन (Jharkhand Governor) ने कुछ सुझाव और आपत्ति के साथ सरकार (Hemant Government) को लौटा दी है. ऐसे में टीएसी के गठन को लेकर राजभवन और राज्य सरकार के बीच मतभेद उभरता हुआ दिख रहा है.

    राज्य की हेमंत सोरेन सरकार के एक साल पूरे होने वाले है, लेकिन अब तक टीएसी का गठन नहीं हो पाया है. देर से ही सही पर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने इसको लेकर फाइल राजभवन को भेजी थी, पर राजभवन ने कुछ सुझाव और कुछ आपत्ति के साथ राज्य सरकार को ये फाइल लौटा दी. झारखंड जैसे पांचवी अनुसूची में शामिल राज्य के लिये टीएसी का गठन बेहद ही जरूरी है.

    झारखंड के लिए क्यों और कितना जरूरी है TAC 



    दरअसल देश के 28 राज्यों में से 10 राज्य पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में शामिल हैं, जिनमें से एक झारखंड भी है. पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में राज्यपाल कस्टोडियन होते हैं. मतलब बगैर राज्यपाल की सहमति के जनजातीय से संबंधित कोई भी निर्णय सरकार नहीं ले सकती. केंद्र सरकार से हर साल झारखंड को ट्राइबल सब प्लान के तहत फंड मिलता है. ये राशि सालाना 33 से 35 हजार करोड़ रुपया के आस-पास होता है. इस राशि का उपयोग जनजातीय समाज के विकास के लिये किया जाता है. मसलन, जनजातीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण से लेकर सिंचाई और संस्कृति-भाषा के विकास पर खर्च किये जाते हैं. प्रदेश में कुल 113 शिड्यूल प्रखंड हैं.

    टीएसी के पूर्व सदस्य रतन तिर्की ने बताया कि टीएसी की फाइल दो बार राजभवन से लौटाई जा चुकी है. दरअसल राजभवन नामित सदस्यों के चरित्र प्रमाण पत्र और कुछ सदस्यों के नाम पर सुझाव और आपत्ति सरकार के समक्ष रखी है.

    टीएसी के पूर्व सदस्य व विधायक बंधु तिर्की कहते हैं कि इससे पहले टीएसी के गठन में इस तरह की उलझन कभी सामने नहीं आई थी. इससे प्रदेश में जनजातीय समाज का विकास प्रभावित हो रहा है.

    झारखंड में टीएसी का मुद्दा कहीं सरकार और राजभवन को आमने-सामने न ले आए. हालांकि सरकार तीसरी बार इससे जुड़ी फाइल राजभवन को भेजने की तैयारी में जुटी है. देखना ये होगा की राजभवन के सुझाव और राज्य सरकार के संशोधन का ये सिलसिला कब तक थमता है, क्योंकि जब तक राज्यपाल की सहमत नहीं होगी, तब तक टीएसी का गठन नामुमकिन सा लगता है.

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