डॉ. बुल्के के अवशेष को दिल्ली से लाया गया रांची, बुधवार को किया जाएगा स्थापित
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डॉ. बुल्के के अवशेष को दिल्ली से लाया गया रांची, बुधवार को किया जाएगा स्थापित
डॉ बुल्के के अवशेष को दिल्ली से लाया गया रांची

महान शिक्षविद् डॉ कामिल बुल्क का देहांत 17 अगस्त 1982 को दिल्ली के एम्स में इलाज के दौरान हुआ था. उन्हें दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित संत निकोलसन सिमेट्री में दफनाया गया था

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हिंदी के मनीषी पद्दभूषण डॉ फादर कामिल बुल्के का अवशेष दिल्ली से रांची लाया गया. बुधवार को रांची में उनके पवित्र अवशेष को संत जेवियर्स कॉलेज परिसर में स्थापित किया जाएगा. यहां उन्होंने हिंदी और संस्कृत के विभागाध्यक्ष के रूप में काम किया था. कॉलेज में बुल्के शोध संस्थान और पुस्तकालय की भी स्थापना की गई है.

महान शिक्षविद् डॉ कामिल बुल्क का देहांत 17 अगस्त 1982 को दिल्ली के एम्स में इलाज के दौरान हुआ था. उन्हें दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित संत निकोलसन सिमेट्री में दफनाया गया था. वहां पांच मार्च को उनके अवशेष को निकालने की प्रक्रिया पूरी हुई. इसके बाद रांची से दिल्ली लाया गया है. दो वर्षों से उने अवशेष को दिल्ली से रांची लाने के प्रयास चल रहे थे.

बेल्जियम में जन्मे डॉ बुल्के 1934 में भारत पहुंचे. 1936 में मुंबई से दार्जिलिंग होते हुए गुमला पहुंचे. यहां उन्होंने पांच साल का गणित पढ़ाया. 1938 में हजारीबाग के सीतागढ़ में पंडित बद्रीदत्त शास्त्री से उन्होंने हिंदी और संस्कृत सीखी. 1950 में डॉ बुल्के को भारत की नागरिकता मिली. 1974 में भारत सरकार ने उन्होंने पद्मभूषण से सम्मानित किया.



बुधवार सुबह रांची के पुरुलिया रोड स्थित मनरेसा हाउस में प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाएगा. यहां डॉ कामिल बुल्के को श्रद्धांजलि दी जाएगी. उसके बाद संत जेवियर्स कॉलेज परिसर में सुबह दस बजे उनकी समाधि बनाई जाएगी.
 
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