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छोटी कद-काठी बनी मुसीबत का सबब, तीन भाइयों ने लगाई सीएम से मदद की गुहार
Ranchi News in Hindi

News18 Jharkhand
Updated: February 11, 2020, 4:21 PM IST
छोटी कद-काठी बनी मुसीबत का सबब, तीन भाइयों ने लगाई सीएम से मदद की गुहार
छोटी कद-काठी के चलते परेशान तीन भाइयों ने सीएम हेमंत सोरेन से मदद की गुहार लगाई

बड़े भाई कलाम खान का कहना है कि 8 साल से ऑटो चला रहा हूं. लेकिन अबतक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बना है. हाइट के चलते बच्चा समझकर छांट दिया जाता है. ऊपर से बिना लाइसेंस के प्रशासन ऑटो चलाने में परेशानी खड़ा करता है.

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रांची. उम्र से बालिग, लेकिन दिखने में नाबालिग, रामगढ़ के कुजू के रहने वाले तीन भाइयों की यही सबसे बड़ी परेशानी है. और इसी परेशानी को लेकर तीनों भाई मंगलवार को सीएम हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) से गुहार लगाने मुख्यमंत्री आवास पहुंचे. लेकिन इनकी सीएम से मुलाकात नहीं हो पाई, पर रांची डीसी (Ranchi DC) ने कुछ हद तक इनकी परेशानी को दूर करने की कोशिश की. उन्होंने रामगढ़ डीसी (Ramgarh DC) से बातकर बड़े भाई कलाम खान को ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) बन जाने का भरोसा दिलाया.

छोटी कद-काठी बनी मुसीबत का सबब

दरअसल तीनों भाइयों की कद-काठी छोटी है. जिसके चलते इन्हें कोई नौकरी पर नहीं रखता. रखता है तो कुछ दिनों में निकाल देता है. बड़े भाई ने ऑटो चलाने की कोशिश की, तो हाइट के चलते ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बन रहा. बड़ा भाई कलाम खान 40 साल के हैं. मंझला कलीम 37 साल और छोटे भाई तस्लीम खान 27 साल के हैं. तीनों अपने छोटे कद को लेकर परेशान हैं.

बड़े भाई कलाम खान का कहना है कि 8 साल से ऑटो चला रहा हूं. लेकिन अबतक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बना है. हाइट के चलते बच्चा समझकर छांट दिया जाता है. ऊपर से बिना लाइसेंस के प्रशासन ऑटो चलाने में परेशानी खड़ा करता है.

मंझले भाई कलीम खान ने बताया कि छोटे हाइट के चलते उन्हें नौकरी नहीं मिलती. अगर मिलती भी है, तो कुछ दिन बाद काम से निकाल दिया जाता है. ऐसे में घर परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है.

छोटा भाई तस्लीम खान का कहना है कि 2016 में बीकॉम करने के बाद से वह रोजगार के लिए भटक रहा है. अप्लाई करने के बावजूद दिव्यांगता का प्रमाण पत्र नहीं बन पाया. ऐसे में मुख्यमंत्री ही तीनों भाइयों के लिए कुछ कर सकते हैं.

पूर्व नक्सलियों के परिजनों ने लगाई गुहारहजारीबाग ओपन जेल में बंद 33 पूर्व नक्सलियों के परिजनों ने भी मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर सीएम हेमंत सोरेन से मदद की गुहार लगाई. 25 लाख के इनामी पूर्व नक्सली बड़ा विकास की पत्नी स्मिता देवी ने कहा कि समर्पण नीति के तहत सरेंडर करने वाले नक्सलियों के खिलाफ दर्ज मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट चलाने का प्रावधान है. लेकिन उनके पतियों के साथ ऐसा हो नहीं रहा. वे लोग ओपन जेल में पिछले चार-पांच साल से बंद हैं. जबकि सामान्य कोर्ट में लंबी सुनवाई के चलते उन्हें काफी खर्च करने पड़ रहे हैं. समर्पण नीति के अन्य लाभ भी उन्हें नहीं दिये गये.

इनपुट- ओमप्रकाश

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First published: February 11, 2020, 4:20 PM IST
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