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    बड़ी खबर: जेल में बंद लालू यादव को बड़ा झटका, अब छठ के बाद होगी जमानत याचिका पर सुनवाई

    लालू प्रसाद यादव. (फाइल फोटो)
    लालू प्रसाद यादव. (फाइल फोटो)

    दुमका ट्रेजरी मामले में जेल में बंद लालू यादव की याचिका पर शुकवार को सुनवाई हुई. इस दौरान CBI ने अपना पक्ष रखने के लिए और वक्‍त की मांग की थी.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 6, 2020, 12:35 PM IST
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    रांची. चारा घोटाला में जेल की सजा काट रहे RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की उम्‍मीदों को तगड़ा झटका लगा है. उन्‍होंने झारखंड हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी. कोर्ट में इस पर शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे 27 नवंबर तक के लिए इसे टाल दिया है. इसका मतलब यह हुआ कि लालू यादव फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे. उनकी जमानत याचिका पर अब छठ महापर्व के बाद सुनवाई होगी. दरअसल, दुमका ट्रेजरी मामले में जेल में बंद लालू यादव की याचिका पर शुकवार को सुनवाई हुई. इस दौरान CBI ने अपना पक्ष रखने के लिए और वक्‍त की मांग की थी. इसके बाद हाईकोर्ट ने इसे 27 नवंबर तक के लिए टाल दिया.

    दुमका ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद यादव आधी सजा काट चुके हैं. इसी आधार पर उन्होंने कोर्ट में जमानत याचिका लगाई. जिसकी सुनवाई कोर्ट ने स्थगित कर दी है. माना जा रहा था कि हाईकोर्ट अगर लालू को ज़मानत दे देता है तो राजद अध्यक्ष का बाहर निकलने का रास्ता साफ हो जाएगा. चारा घोटाले के अन्य मामलों में लालू यादव को पहले ही जमानत मिल चुकी है. फिलहाल, लालू प्रसाद रांची के रिम्स में इलाजरत हैं.

    कब-कब और कितनी सुनाई गई सजा
    >> सीबीआई अदालत ने लालू को चारा घोटाले के नियमित मामले में RC 20A/96 में दोषी पाया और पांच वर्ष की सजा सुनाई, जबकि 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.
    >> देवघर कोषागार से जुड़े RC 64A/96 में दोषी पाया गया और साढ़े तीन वर्ष की सजा सुनाई गई, जबकि 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया.



    >> चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के संबंध में RC 68A/96 में दोषी पाया गया और पांच वर्ष की सजा सुनाई गई, जबकि 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया.

    दुमका कोषागार से जुड़े मामले में विभिन्न धाराओं में सात-सात वर्ष की सजा सुनाई गई. दरअसल यह महाघोटाला उस समय सुर्खियों में आया जब चारा घोटाले के संबंध में पश्चिमी सिंहभूम जिले (चाईबासा) के तत्कालीन उपायुक्त अमित खरे ने 27 जनवरी 1996 को उजागर किया. बिहार पुलिस ने इसपर केस दर्ज किया और जांच आगे बढ़ाई तो इसके तार लालू प्रसाद यादव और अन्य से जुड़े निकले. बाद में सीबीआई ने इस केस को टेकअप कर जांच शुरू की, जो पिछले 24 वर्षों से चल रहा है.
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