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Incredible Jharkhand: महिषासुर को पूर्वज मानता है यह आदिवासी समुदाय, दिवाली के दिन करता है पूजा

Incredible Jharkhand: असुर जनजाति के लोग महिषासुर को पूजते हैं. (सांकेतिक तस्‍वीर)

Incredible Jharkhand: असुर जनजाति के लोग महिषासुर को पूजते हैं. (सांकेतिक तस्‍वीर)

Jharkhand Culture : झारखंड में आदिवासियों की असुर जनजाति के कुछ लोग महिषासुर को अपना पूर्वज मानते हुए पूजा-अर्चना करते हैं. दीपावली की रात महिषासुर की खास पूजा की जाती है.

  • News18Hindi
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    रांची. कुछ ही हफ़्तों बाद देश में दुर्गा पूजा की धूम होगी. लोग उपवास रखकर भी आदि शक्ति की उपासना करते हैं. लेकिन, आज हम आपको एक ऐसे आदिवासी समुदाय के बारे में बताने जा रहे हैं, जो देवी दुर्गा की नहीं, बल्कि महिषासुर की पूजा करते हैं. जी हां! इस आदिवासी समुदाय का नाम असुर है. इस जनजाति के लोग अन्‍य जिलों के साथ खासकर गुमला में पाए जाते हैं. असुर जनजाति के लोग महिषासुर को अपना पूर्वज मानते हुए दीपावली के दिन पूजा-अर्चना करते हैं.

    असुर जनजाति के लोग पहाड़ों और जंगलों में निवास करते हैं. मां दुर्गा की पूजा के बाद इस जनजाति के लोग प्राचीन परंपराओं को मानते हुए महिषासुर की पूजा करते हैं. ये लोग महिषासुर की पूजा उसी निष्‍ठा और समर्पण से करते हैं, जिस तरह अन्‍य धर्म और समुदाय के लोग अपने आराध्‍य देव की पूजा-अर्चना करते हैं. यह झारखंड के साथ ही भारत की धार्मिक-सांस्‍कृतिक विविधता को भी दर्शाता है.

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    आदिवासी समुदाय असुर में दुर्गा पूजा के बाद आने वाले दीपावली महापर्व के मौके पर महिषासुर की पूजा का चलन है. दिलचस्‍प है कि ये लोग महिषासुर की प्रतिमा नहीं बनाते हैं. ये लोग दुर्गा पूजा के तुरंत बाद महिषासुर की पूजा की तैयारियों में जुट जाते हैं. असुर जनजाति के लोग दीपावली की रात मिट्टी का पिंड बनाकर पूजा अर्चना करते हैं. इस दौरान समुदाय के लोग अपने पूर्वज को भी याद करते हैं.

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    पहले माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं और फिर उसके बाद देर शाम दीया जलाने के बाद महिषासुर की पूजा की जाती है. दीपावली में गौशाला की पूजा असुर जनजाति के लोग बड़े पैमाने पर करते हैं. हर 12 वर्ष में एक बार महिषासुर की सवारी भैंसा (काड़ा) की भी पूजा करने की परंपरा है. गुमला जिले के बिशुनपुर, डुमरी, घाघरा, चैनपुर, लातेहार जिला के महुआडाड़ प्रखंड के इलाके में भैंसा की पूजा की जाती है. बिशुनपुर प्रखंड के पहाड़ी क्षेत्र में भव्य रूप से पूजा होती है. इस दौरान मेला भी लगता है.

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