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दुर्गा पूजा विशेष: शाकाहारी बलि की अनोखी परंपरा, जानें रांची के मजूमदार परिवार का बांग्लादेश कनेक्शन

रांची के मजूमदार फैमिली में होती है अनोखी दुर्गा पूजा

रांची के मजूमदार फैमिली में होती है अनोखी दुर्गा पूजा

Durga Puja 2021: नवरात्रि में बलि प्रथा का पुराना इतिहास रहा है. लेकिन, भानु मजूमदार के पिता को बाद में ऐसा लगा की शायद आने वाली पीढ़ी इसे नहीं निभा पाएगी. इसलिये उन्होंने इसे रोकने का निर्णय लिया. लेकिन दुर्भागयवश उसी साल उनकी मृत्यु हो गई.

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रांची. मां दुर्गा के आगमन के साथ देश भर में उपासना और आराधना का दौर शुरू हो गया है. इस दौरान राजधानी रांची में भी दुर्गा पूजा के कई रंग देखने को मिल रहे हैं. कहीं पुरानी परंपरा और मान्यता को निभाते हुए मां दुर्गा की पूजा हो रही है, तो कहीं कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए लोग मां दुर्गा की शरण में मथ्था टेक रहे हैं. इस बीच राजधानी रांची का मजूमदार परिवार भी चर्चा में है. रांची के राधेश्याम गली में 108 साल पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने का सिलसिला जारी है. बांग्लादेश से शुरू हुई मां दुर्गा की आराधना देश बंटवारे के बाद से भारत में भी उतनी ही उत्साह और उमंग के साथ की जा रही है. यहां आपको मां दुर्गा की बायीं ओर भगवान गणेश विराजमान दिखेंगे, जबकि भगवान कार्तिक का स्थान मां दुर्गा की दायीं ओर देखने को मिलेगा.

दरअसल, इसकी शुरुआत देश बंटवारे से पहले हुई थी. तब भानु मजूमदार के पिता ने बांग्लादेश में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना शुरू की थी. कुछ वर्षों तक ऐसा ही चलता रहा. देश बंटवारे के बाद मजूमदार परिवार रांची में आ कर बस गए. नवरात्रि में बलि प्रथा का पुराना इतिहास रहा है. लेकिन, भानु मजूमदार के पिता को बाद में ऐसा लगा की शायद आने वाली पीढ़ी इसे नहीं निभा पाएगी. इसलिये उन्होंने इसे रोकने का निर्णय लिया. लेकिन दुर्भागयवश उसी साल उनकी मृत्यु हो गई. परिवार के सदस्यों को ऐसा लगा कि मां दुर्गा नाराज हो गई हैं. इसके बाद फिर से बलि प्रथा की शुरुआत कर दी गई. बलि के तौर पर कोहड़ा, खीरा, ईख को मां के चरणों में चढ़ाया जाता है.

सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक बात है वो यह कि भगवान गणेश और कार्तिक के स्थान में परिवर्तन. इसको लेकर भानु मजूमदार का कहना है कि जब भी पूजा अर्चना शुरू होती है तब धूप – अगरबत्ती या आरती के वक्त पुरोहित दाहिनी ओर से हाथ को उठाते हैं, इसलिये सबसे पहले भगवान गणेश की ओर से ही श्री गणेश करने की पुरानी परंपरा है.

बांग्लादेश में भी ठीक इसी प्रारूप में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है. आज मजूमदार परिवार का हर एक सदस्य चाहे वो जहां कही भी हो, मां दुर्गा की पूजा के लिये रांची जरूर पहुंचता है. मजूमदार परिवार के आज की पीढ़ी में अपनी पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने और इसे बचाये रखने का संकल्प दिखता है.

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