झारखंड में अब वेटेज फॉर्मूले के तहत होगा शिक्षकों का तबादला, नई नीति के बारे में पढ़ें यहां

स्कूली शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि ट्रांसफर का मुद्दा विभाग के लिए विवाद का विषय रहा है. ऐसे में इसे पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने स्वैच्छिक स्थानांतरण नीति तैयार की है

News18 Jharkhand
Updated: June 17, 2019, 6:20 PM IST
झारखंड में अब वेटेज फॉर्मूले के तहत होगा शिक्षकों का तबादला, नई नीति के बारे में पढ़ें यहां
अमरेन्द्र प्रताप सिंह, प्रधान सचिव, स्कूली शिक्षा विभाग
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Updated: June 17, 2019, 6:20 PM IST
झारखंड में शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के तबादले के लिए नयी नीति तैयार की है. इसे अगस्त तक लागू हो जाने की संभावना है. नई नीति के तहत शिक्षकों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा और अपने तबादले की वजह बतानी होगी. साथ ही शिक्षकों को शहर में पदस्थापना के लिए अधिकतम पांच साल का मौका मिलेगा.

अपने जोन में देना होगा आवेदन 

नई तबादला नीति के तहत यदि एक पद के लिए एक से ज्यादा शिक्षकों ने तबादले का आवेदन दिया, तो वैसे शिक्षक यह जान पाएंगे कि उनकी तुलना में दूसरे शिक्षकों के आवेदन में कितना दम है. साथ ही अपने जोन में ही शिक्षकों को तबादले के लिए आवेदन देना होगा.

वेटेज फॉर्मूले के तहत होगा तबादला

स्कूली शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि ट्रांसफर का मुद्दा विभाग के लिए विवाद का विषय रहा है. ऐसे में इसे पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने स्वैच्छिक स्थानांतरण नीति तैयार की है. यह ऑनलाइन होगी. इसमें वेटेज फॉर्मूले के तहत शिक्षकों का तबादला होगा. इसके लिए सूबे को कई जोन में बांटा गया है.

कैबिनेट की मंजूरी के बाद होगा लागू

स्कूली शिक्षा विभाग का यह प्रस्ताव फिलहाल वित्त विभाग के पास है. वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बाद यह कैबिनेट में जायेगा. वहां से स्वीकृति मिलने पर इसे लागू कर दिया जाएगा. हालांकि उससे पहले सरकार की इस नीति पर बवाल शुरू हो गया है. माध्यमिक शिक्षक संघ ने इसे स्कूली व्यवस्था को खत्म करने वाला बताया है.
नई नीति से हो जाएगी शिक्षा व्यवस्था चौपट

संघ के अध्यक्ष सुरेन्द्र झा कहते हैं कि नई नीति राज्य, शिक्षक और यहां तक की छात्रों के हित में भी नहीं है. अभी जो शिक्षक गांव में तैनात हैं, वे अपनी स्वेच्छा से हैं. लेकिन नई नीति के तहत अगर शहर के शिक्षक गांव जाएंगे, तो वे वहां रहकर पढ़ाने की बजाय अधिकारियों को घूस देकर हाजरी बनाने की कोशिश करेंगे. ऐसे में गांव की शिक्षा व्यवस्था चौपट हो जाएगी.

अगस्त में लागू करने की तैयारी

हालांकि एक सच्चाई यह भी है कि शिक्षकों के तबादले में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक होते हैं, जिन्हें व्यक्तिगत परेशानी होती है. बहरहाल अगस्त के बाद पता चलेगा कि यह नीति कारगर साबित होगी या व्यवस्था को बर्बादी के कगार पर ले जाएगी.

रिपोर्ट- अजय लाल

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