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झारखंडः न आयुक्त न सचिव, पता नहीं कब और कैसे होंगे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव

राज्य निर्वाचन आयोग में वरिष्ठ अधिकारी न होने की वजह से पंचायती राज चुनाव टल जाएंगे.
राज्य निर्वाचन आयोग में वरिष्ठ अधिकारी न होने की वजह से पंचायती राज चुनाव टल जाएंगे.

Jharkhand Panchayat Chunav 2020: राज्य निर्वाचन आयोग ने पत्र लिखकर सरकार को बता दिया है कि यहां निर्वाचन आयुक्त से लेकर सचिव तक के पद खाली हैं. 2015 में हुए पंचायत चुनाव के पांच वर्ष का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है.

  • Last Updated: December 5, 2020, 12:11 PM IST
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रांची. राज्य में दिसंबर में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (Jharkhand Panchayat Chunav 2020) कब होंगे कहा नहीं जा सकता. राज्य निर्वाचन आयोग में मुख्य आधिकारिक पद खाली होने की वजह से ये चुनाव लटक गए हैं. सरकार की इस लेटलतीफी की वजह से राज्य में पंचायती राज चुनाव का संकट खड़ा हो गया है. हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) ने सरकार को पत्र लिखकर इस संबंध में सूचना दे दी है. इस स्थिति में राज्य को केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता से हाथ धोना पड़ सकता है. चुनाव आयोग राज्य में होने वाले नगर निकाय चुनावों को पहले ही अनिश्चितकाल समय के लिए टाल चुकी है.

राज्य निर्वाचन आयोग ने पत्र लिखकर सरकार को बता दिया है कि यहां निर्वाचन आयुक्त से लेकर सचिव तक के पद खाली हैं. 2015 में हुए पंचायत चुनाव के पांच वर्ष का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है. राज्य निर्वाचन आयोग में अधिकारी न होने की वजह से चुनाव कार्य भी बाधित हो रहा है. गौरतलब है कि इस स्थिति में राज्य में गांव की सरकार कागजों पर ही सिमटकर रह जाएगी. सरकार द्वारा 2015 में निर्वाचित हुए जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल न तो बढ़ाया गया है और न ही चुनाव को लेकर कोई दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.

सरकार ने नहीं दिखाई गंभीरता
जानकारी के मुताबिक, राज्य निर्वाचन आयुक्त एनएन पांडेय की नियुक्ति 16 जून 2017 को हुई थी. उनका कार्यकाल इस वर्ष 25 जून को खत्म हो गया. उस समय से राज्य निर्वाचन आयुक्त का पद खाली है. प्रावधान के अनुसार निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल तीन वर्ष या इस पद पर आसीन व्यक्ति की अधिकतम उम्र 64 वर्ष निर्धारित है. लेकिन उनके जाने के बाद आयोग में किसी तरह की नियुक्ति नहीं की गई है. दरअसल, राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई, जिस वजह से पिछले 6 महीनों में राज्य निर्वाचन आयुक्त का पद भरा नहीं जा सका. गौरतलब है कि पंचायत चुनाव न होने से राज्य को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. राज्य केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता से हाथ धो सकता है.
बता दें, इससे पहले धनबाद, देवघर, चास नगर निगम सहित राज्य के 15 शहरी नगर निकायों में मई में चुनाव कराए जाने थे, मगर कोरोना संकट के कारण आयोग ने इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था. इस बीच राज्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल भी खत्म हो गया और चुनाव टलते चले गए.



महीनों पहले शुरू हो जाती है तैयारी
2015 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के अनुसार राज्य में मुखिया के 4402, जिला परिषद क्षेत्र के 545, पंचायत समिति सदस्य के 5423 और ग्राम पंचायत सदस्य के 54330 पदों के चुनाव होने हैं. इन चुनावों के लिए क्षेत्र के पुर्ननिर्धारण से लेकर मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया निर्वाचन आयुक्त के निर्देश पर कई महीनों पहले शुरू हो जाती है.
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