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रांची के इस आश्रम में एक बूंद पानी भी नहीं जाता नाले में

आश्रम के विशाल भू-भाग में एक दर्जन से अधिक कार्यालय व छात्रावास हैं. इन सभी भवनों पर गिरने वाले बारिश के पानी को इंटरकनेक्टेड पाइपलाइन के जरिये कुएं में लाकर गिरा दिया जाता है.

आश्रम के विशाल भू-भाग में एक दर्जन से अधिक कार्यालय व छात्रावास हैं. इन सभी भवनों पर गिरने वाले बारिश के पानी को इंटरकनेक्टेड पाइपलाइन के जरिये कुएं में लाकर गिरा दिया जाता है.

आश्रम के विशाल भू-भाग में एक दर्जन से अधिक कार्यालय व छात्रावास हैं. इन सभी भवनों पर गिरने वाले बारिश के पानी को इंटरकनेक्टेड पाइपलाइन के जरिये कुएं में लाकर गिरा दिया जाता है.

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    रांची के मोरहाबादी इलाके में स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम जल संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल है. यह आश्रम 23 एकड़ में फैला हुआ है, जहां बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ खेती- किसानी का भी पाठ पढ़ाया जाता है. भारी मात्रा में सब्जी व फल की खेती भी की जाती है. लेकिन सबसे गौर करने वाली बात यह है कि इतने बड़े भू-भाग में फैले होने के बावजूद यहां एक बूंद पानी नाले में नहीं जाता, बल्कि एक-एक बूंद पानी को संरक्षित किया जाता है.

    पाइपलाइन से कुएं में गिरता है बारिश का पानी

    दरअसल आश्रम के विशाल भू-भाग में एक दर्जन से अधिक कार्यालय व छात्रावास हैं. इन सभी भवनों पर गिरने वाले बारिश के पानी को इंटरकनेक्टेड पाइपलाइन के जरिये कुएं में लाकर गिरा दिया जाता है. ऐसे में जब भी बारिश होती है, यह कुआं रिचार्ज होते रहता है. कुएं में वाटर लेबल बने रहने के कारण पास के बोरवेल में पानी का स्तर कभी नीचे नहीं जाता. आश्रम परिसर में यह भी दिखाया गया है कि किस तरह ग्रामीण क्षेत्रों के लोग पहाड़ से रिसने वाले पानी को स्टोर कर रखते हैं.

    सोच है, तो जल संरक्षण है!

    आश्रम के स्वामी भवेशानंद जी कहते हैं कि जल संरक्षण सोच पर निर्भर करता है. इसके लिए मोटी रकम की जरूरत नहीं पड़ती है. मामूली रकम खर्च कर लोग पानी को संचित कर सकते हैं. जनता जागरूक हो गई, तो रांची में गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत नहीं होगी.

    आश्रम में नहीं होती पानी की परेशानी

    बता दें कि गर्मी के दिनों में राजधानी के अधिकतर इलाके पानी की किल्लत की जद में आ जाते हैं. लेकिन इस आश्रम में कभी पानी की परेशानी नहीं होती है.

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