आपके लिए इसका मतलब : जानिए क्यों झारखंड में सफल है नक्सल आत्मसमर्पण नीति

पिछले 5 सालों में 126 प्रतिबंधित संगठन के लोग या तो गिरफ्तार हुए हैं या तो उन्होंने आत्मसमर्पण किया है.

पिछले 5 सालों में 126 प्रतिबंधित संगठन के लोग या तो गिरफ्तार हुए हैं या तो उन्होंने आत्मसमर्पण किया है.

झारखंड में नक्सलियों (Naxalites) के खिलाफ सुरक्षाबलों (Security Forces) ने जोरदार अभियान चला रखा है. इसी वजह से नक्सलियों के बड़े नेता मारे जा रहे हैं या फिर आत्मसमर्पण कर रहे हैं.

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रांची. पिछले कुछ सालों से झारखंड में नक्सलियों (Naxalites) के खिलाफ पर सुरक्षाबलों (Security Forces) ने व्यापक स्तर पर अभियान छेड़ा है. इसका नतीजा यह हुआ है कि नक्सलियों को इस इलाके में भारी नुकसान उठाना पड़ा है. नक्सलियों के बड़े नेता या तो आत्मसमर्पण कर रहे हैं या फिर मारे जा रहे हैं. बहुत ज्यादा तादात नक्सलियों की झारखंड में आत्मसमर्पण (Surrender) करने वाले लोगों की है. झारखंड का सीमावर्ती जिला चतरा सर्वाधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में से एक है और पिछले 5 सालों में यहां कई इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. ताजा मामला है 1000000 इनामी रघुवंश गंजू पूर्व नक्सली के आत्मसमर्पण करने का है.

पिछले 5 सालों में जिन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है वह तृतीय सम्मेलन प्रसूत कमेटी से जुड़े हुए हैं. इस संगठन ने नब्बे के दशक में सुरक्षा बलों का समर्थन किया था नक्सल विरोधी अभियान में. नक्सलियों की घटती ताकत के बाद से इनके सदस्य एक बेहतर जीवन व्यापन की तलाश में थे. नक्सली संगठनों के यह पूर्व सदस्य सरकार के नुमाइंदों से संपर्क करने में कतराते थे और एक निश्चित दूरी बनाकर रखते थे, लेकिन पिछले 5 सालों में हालात तेजी से बदले हैं.

क्यों इस संगठन के लोगों ने आत्मसमर्पण किया?

झारखंड में पिछले कुछ सालों में सुरक्षाबलों द्वारा चलाया गया नक्सल विरोधी अभियान खासा सफल रहा है. सीआरपीएफ 190 बटालियन जो की चतरा इलाके में तैनात है वह अंदरूनी इलाके में पहुंच चुकी है. सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस का सीधे तौर पर तृतीय सम्मेलन प्रसुत कमेटी के सदस्यों से लगातार संपर्क रहा है. इन सदस्य के लोगों को समझाया जाता है कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति क्या है जिससे इनका विश्वास भारतीय व्यवस्था के प्रति पैदा होता है. संवाद के दौरान संगठन के लोगों को यह भी बताया जाता है जो इनाम इन पर है वह इनको ही मिलेगा. इनके भविष्य के लिए सरकार रोजगार मुहैया करवाएगी. इसके अलावा इन के ऊपर जितने मामले चल रहे हैं उसमें भी सरकार की ओर से इन को मदद मिलेगी. इससे इनके भीतर विश्वास पैदा होता है और वह आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित होते हैं.
कितनी सफल रही है पुलिस और सीआरपीएफ की चतरा में रणनीति

चतरा और आसपास के इलाकों में पिछले 5 सालों में 126 प्रतिबंधित संगठन के लोग या तो गिरफ्तार हुए हैं या तो उन्होंने आत्मसमर्पण किया है. पिछले चार दशक से मिनी जाफना के नाम से जाने जाने वाले इस इलाके के लिए यह किसी करिश्मे से कम नहीं हैं. बीएसएफ के रिटायर्ड आईजी जेपी सिन्हा के मुताबिक, जब मुख्यधारा में प्रतिबंधित संगठन के लोग आएंगे तो जाहिर सी बात है कि उनके परिवारों को भी एक बेहतर जिंदगी का मौका मिलेगा और अब चतरा जैसे अंदरूनी इलाके में इस बात की शुरुआत हो चुकी है.
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